भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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10 करोड़ लोगों को मौत के घाट उतारने वाले लोग आज हमको सिखाते है कि हिंदुस्तान में ह्यूमन राईट की स्थिति बहुत खराब है। जिनका इतिहास ही ह्यूमन राईट के वोइलेसन्. पे टिका हुआ है, जिनकी पूरी की पूरी सभ्यता 10 करोड़ लोगों की लाश पर टिकी हुई है, जिनकी पूरी की पूरी तरक्की और विकास 10 करोड़ रेड इंडियनों लोगों के खून से लिखा गया है, ऐसे अमरीका के लोग आज हमको कहते है कि हिंदुस्तान में साहब, ह्यूमन राईट की बड़ी खराब स्थिति है, कश्मीर में, पंजाब में, वगेरह वगेरह, और जो काम मारने का, पीटने का, लोगों की हत्याएं कर के सोना लूटने का, चांदी लूटने का काम कोलंबस और स्पेन के लोगों ने अमेरीका में किया, ठीक वही काम वास्कोडीगामा ने 1498 में हिंदुस्तान में किया।

ये वास्कोडीगामा जब कालीकट में आया, 20 मई, 1498 को, तो कालीकट का राजा था उस समय झामोरिन, तो झामोरिन के राज्य में जब ये पहुंचा वास्को डी गामा, तो उसने कहा कि मैं तो आपका मेहमान हूँ, और हिंदुस्तान के बारे में उसको कहीं से पता चल गया था कि इस देश में “अतिथि देवो भव” की परंपरा, तो झामोरिन ने बेचारे ने, ये अतिथि है ऐसा मान कर उसका स्वागत किया, वास्को डी गामा ने कहा कि मुझे आपके राज्य में रहने के लिए कुछ जगह चाहिए, आप मुझे रहने की इजाजत दे दो, परमिशन दे दो। झामोरिन बेचारा सीधा सदा आदमी था, उसने कालीकट में वास्को डी गामा को रहने की इजाजत दे दी। जिस वास्को डी गामा को झामोरिन के राजा ने अतिथि बनाया, उसका आथित्य ग्रहण किया, उसके यहाँ रहना शुरू किया, उसी झामोरिन की वास्को डी गामा ने हत्या करायी, और हत्या करा के खुद वास्को डी गामा कालीकट का मालिक बना, और कालीकट का मालिक बनने के बाद उसने क्या किया कि समुद्र के किनारे है कालीकट केरल में, वहां से जो जहांज आते जाते थे, जिसमे हिन्दुस्तानी व्यापारी अपना माल भर-भर के साउथ ईस्ट एशिया और अरब के देशों में व्यापार के लिए भेजते थे, उन जहांजो पर टैक्स वसूलने का काम वास्को डी गामा करता था, और अगर कोई जहांज वास्को डी गामा को टैक्स ना दे, तो उस जहांज को समुद्र में डुबोने का काम वास्कोडीगामा करता था, और वास्कोडीगामा हिंदुस्तान में आया पहली बार 1498 में, और यहाँ से जब लूट के सम्पत्ति ले गया, तो 7 जहांज भर के सोने की अशर्फिया थी। पोर्तुगीज सरकार के जो डॉक्यूमेंट है वो बताते है कि वास्कोडीगामा पहली बार जब हिंदुस्तान से गया, लूट कर सम्पत्ति को ले कर के गया, तो 7 जहांज भर के सोने की अशर्फिया, उसके बाद दुबारा फिर आया वास्कोडीगामा। वास्कोडीगामा हिंदुस्तान में 3 बार आया लगातार लूटने के बाद, चौथी बार भी आता लेकिन मर गया, दूसरी बार आया तो हिंदुस्तान से लूट कर जो ले गया वो करीब 11 से 12 जहांज भर के सोने की अशर्फिया थी, और तीसरी बार आया और हिंदुस्तान से जो लूट कर ले गया वो 21 से 22 जहांज भर के सोने की अशर्फिया थी। इतना सोना चांदी लूट कर जब वास्को डी गामा यहाँ से ले गया तो पुर्तगाल के लोगों को पता चला कि हिंदुस्तान में तो बहुत सम्पत्ति है, और भारतवर्ष की सम्पत्ति के बारे में उन्होंने पुर्तगालियों ने पहले भी कहीं पढ़ा था, उनको कहीं से ये टेक्स्ट मिल गया था कि भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पर महमूद गजनवी नाम का एक व्यक्ति आया,

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