स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपहले लूटने के लिए चलो सूरत, पूरे हिंदुस्तान में कहीं नहीं गए, सबसे पहले सूरत में आए और सूरत में आकर ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए कोठी बनानी है, ऐसा वहां के नवाब के आगे उन्होंने फरमान रखा, बेचारा नवाब सीधा सदा था, उसने अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी को कोठी बनाने के लिए जमीन दे दी, कभी आप जाइए सूरत में, वो कोठी आज भी खड़ी हुई है, उसका नाम है, कुपर विला। एक अंग्रेज था उसका नाम था जेम्स कुपर, 6 अधिकारी आए थे सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी के, उनमें से एक अधिकारी था जेम्स कूपर, तो जेम्स कूपर ने अपने नाम पर उस कोठी का नाम रख दिया कुपर विला, तो ईस्ट इंडिया कंपनी की सबसे पहली कोठी बनी सूरत में, सूरत के लोगों को मालूम नहीं था, कि जिन अंग्रेजों को कोठी बनाने के लिए हम जामीन दे रहे हैं, बाद में यही अंग्रेज हमारे खून के प्यासे हो जाएंगे, अगर ये पता होता तो कभी अंग्रेजों को सूरत में ठहरने की भी जमीन नहीं मिलती।
अंग्रेजों ने फिर वही किया जो उनका असली चरित्र था। पहले कोठी बनाई, व्यापार शुरू किया, धीरे धीरे पूरे सूरत शहर में उनका व्यापार फैला, और फिर सन्। 1612 में सूरत के नवाब की हत्या करायी, जिस नवाब से जमीन लिया कोठी बनाने के लिए, उसी नवाब की हत्या करायी अंग्रेजों ने और 1612 में जब नवाब की हत्या करा दी उन्होंने, तो सूरत का पूरा एक पूरा बंदरगाह अंग्रेजों के कब्जे में चला गया। और अंग्रेजों ने जो काम सूरत में किया था सन्। 1612 में, वही काम कलकत्ता में किया, वही काम मद्रास में किया, वही काम दिल्ली में किया, वही काम आगरा में किया, वही काम लखनऊ में किया, माने जहाँ भी अंग्रेज जाते थे अपनी कोठी बनाने के लिए अपनी ईस्ट इंडिया कंपनी को ले के, उस हर शहर पर अंग्रेजों का कब्जा होता था, और ईस्ट इंडिया कंपनी का झंडा फहराया जाता था। 200 वर्षों के अंदर व्यापार के बहाने अंग्रेजों ने सारे देश को अपने कब्जे में ले लिया, 1750 तक आते आते सारा देश अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का गुलाम हो गया।
किसी को नहीं मालूम था कि जिस ईस्ट इंडिया कम्पनी को हम व्यापार के लिए छुट दे रहे हैं, जिन अंग्रेजों को हम व्यापार के लिए जमीन दे रहे हैं, जिन अंग्रेजों को व्यापार के लिए हिंदुस्तान में हम बुला के ला रहे हैं, वही अंग्रेज इस देश के मालिक हो जाएंगे, ऐसा किसी को
अंदाजा नहीं था, अगर ये अंदाजा होता तो शायद कभी उनको छुट न मिलती, लेकिन 1750 में ये अंदाजा हुआ, और अंदाजा हुआ 1 व्यक्ति को, उसका नाम था सिराजुद्दौला,
बंगाल का नवाब था, गया कि अंग्रेज इस बनाने आए है, इस बहुत है, क्योंकि इस अंग्रेजों के खिलाफ
तो बंगाल का नवाब था सिराजुद्दौला, उसको ये अंदाजा हो देश में व्यापार करने नहीं आए है, इस देश को गुलाम देश को लूटने के लिए आए है। क्योंकि इस देश में सम्पत्ति देश में पैसा बहुत है, तो सिराजुद्दौला ने फैसला किया कि कोई बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ेगी, और उस बड़ी को लड़ाई लड़ने के लिए सिराजुद्दौला ने युद्ध किया अंग्रेजों के खिलाफ, इतिहास की चोपड़ी में आपने पढ़ा
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