भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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होगा कि प्लासी का युद्ध हुआ, 1757 में, लेकिन इस युद्ध की एक खास बात है जो मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ, आज के समय में भी वो बहुत महत्वपूर्ण है। मैं बचपन में जब विद्यार्थी था कक्षा 9 में पढ़ता था, तो मैं मेरे इतिहास के अध्यापक से ये पूछता था कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों की तरफ से कितने सिपाही थे लड़ने वाले, तो मेरे अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम, तो मैं कहता था क्यों नहीं मालूम, तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढ़ाया तो मैं तुमको कहाँ से पढ़ा दूँ, तो मैं उनको बराबर एक ही सवाल पूछता था कि सर आप जरा ये बताइये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है कि नहीं तो फिर हमको ये क्यों नहीं पढ़ाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही अंग्रेजों के पास और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल मैं पूछता था कि अच्छा ये बताइये कि अंग्रेजों के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालूम सिराजुद्दौला जो लड़ रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो कहते थे कि वो भी नहीं मालूम। प्लासी के युद्ध के बारे में इस देश में इतिहास की 150 किताबें हैं जो मैंने देखी है, उन 150 में से एक भी किताब में ये जानकारी नहीं दी गई है कि अंग्रेजों की तरफ से कितने सिपाही लड़ने वाले थे और हिंदुस्तान की तरफ से कितने सिपाही लड़ने वाले थे और मैं आपको सच बताऊं मैं मेरे बचपन से इस सवाल से बहुत परेशान रहा और इस सवाल का जवाब अभी 3 साल पहले मुझे मिला, वो भी हिंदुस्तान में नहीं मिला लन्दन में मिला।

लन्दन में एक इंडिया हाउस लाइब्रेरी है बहुत बड़ी लाइब्रेरी है, उस इंडिया हाउस लाइब्रेरी में हिंदुस्तान के गुलामी के 20000 से भी ज्यादा दस्तावेज़ रखे हुए हैं, जो हमारे देश में नहीं हैं वहां रखे हुए हैं, भारतवर्ष को अंग्रेजों ने कैसे तोड़ा कैसे गुलाम बनाया इसकी पूरी विस्तृत जानकारी उन 20000 दस्तावेजों में इंडिया हाउस लाइब्रेरी में मौजूद है। मेरे एक परिचित है प्रोफेसर धर्मपाल, वो 40 वर्ष तक यूरोप में रहे हैं, मैंने एक बार उनको एक चिट्ठी लिखी, मैंने कहा सर, मैं ये जानना चाहता हूँ बेसिक प्रश्न कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों के पास कितने सिपाही थे? तो उन्होंने कहा देखो राजीव, अगर तुमको ये जानना है तो बहुत कुछ जानना पड़ेगा, और तुम तैयार हो जानने के लिए, तो मैंने कहा मैं सब जानना चाहता हूँ। मैं इतिहास का विद्यार्थी नहीं लगा लेकिन इतिहास को समझना चाहता हूँ कि ऐसी कौन सी खास बात थी जो हम अंग्रेजों के गुलाम हो गए, ये समझ में तो आना चाहिए अपने को, कि कैसे हम अंग्रेजों के गुलाम हो गए, ये इतना बड़ा देश, 34 करोड़ की आबादी वाला देश 50 हजार अंग्रेजों का गुलाम कैसे हो गया ये समझना चाहिए, तो वो प्लासी के युद्ध पर से वो समझ में आया। उन्होंने कुछ दस्तावेज़ मुझे भेजे, फोटोकॉपी करा के और मेरे पास अभी भी है। उन दस्तावेजों को जब मैं पढ़ता था तो मुझे पता चला कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों के पास मात्र 300 सिपाही थे, 300 और सिराजुद्दौला के पास 18000 सिपाही थे। अब किसी भी सामने के विद्यार्थी से, बच्चे से, या सामान्य बुद्धि के आदमी से आप ये पूछें के एक बाजू में 300 सिपाही, और दूसरे बाजू में 18000 सिपाही, कौन जीतेगा? 18000 सिपाही जिनके पास हैं वो जीतेगा।

लेकिन जीता कौन ? जिनके पास मात्र 300 सिपाही थे वो जीत गए, और जिनके पास 18000 सिपाही थे वो हार गए और हिंदुस्तान के, भारतवर्ष के एक एक सिपाही के बारे में अंग्रेजों के पार्लियामेंट में ये कहा जाता था कि भारतवर्ष का 1 सिपाही अंग्रेजों के 5 सिपाही को मारने के लिए

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