भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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काफी है, इतना ताकतवर, तो इतने ताकतवर 18000 सिपाही अंग्रेजों के कमजोर 300 सिपाहियों से कैसे हारे ये बिलकुल गम्भीरता से समझने की जरूरत है, और उन दस्तावेजों को देखने के बाद मुझे पता चला कि हम कैसे हारे? अंग्रेजों की तरफ से जो लड़ने आया था उसका नाम था रोबर्ट क्लाइव, वो अंग्रेजी सेना का सेनापति था और भारतवर्ष की तरफ से जो लड़ रहा था सिराजुद्दौला, उसका भी एक सेनापति था, उसका नाम था मीर जाफर, तो हुआ क्या था रोबर्ट क्लाइव ये जनता था कि अगर भारतीय सिपाहियों से सामने से हम लड़ेंगे तो हम 300 लोग है मारे जाएंगे, 2 घंटे भी युद्ध नहीं चलेगा और क्लाइव ने इस बात को कई बार ब्रिटिश पार्लियामेंट को चिट्ठी लिख के कहा था। क्लाइव की 2 चिट्ठियाँ हैं उन दस्तावेजों में, एक चिट्ठी में क्लाइव ने लिखा कि हम सिर्फ 300 सिपाही है, और सिराजुद्दौला के पास 18000 सिपाही है। हम युद्ध जीत नहीं सकते हैं, अगर ब्रिटिश पार्लियामेंट अंग्रेजी पार्लियामेंट ये चाहती है कि हम प्लासी का युद्ध जीते, तो जरूरी है कि हमारे पास और सिपाही भेजे जाए।

उस चिट्ठी के जवाब में क्लाइव को ब्रिटिश पार्लियामेंट की एक चिट्ठी मिली थी और वो बहुत मजेदार है उसको समझना चाहिए। उस चिट्ठी में ब्रिटिश पार्लियामेंट के लोगों ने ये लिखा कि हमारे पास इससे ज्यादा सिपाही है नहीं, क्यों नहीं है ? क्योंकि 1757 में जब प्लासी का युद्ध शुरू होने वाला था उसी समय अंग्रेजी सिपाही फ्रांस में नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे और नेपोलियन बोनापार्ट क्या था अंग्रेजों को मार मार के फ्रांस से भगा रहा था, तो पूरी की पूरी अंग्रेजी ताकत और सेना नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ फ्रांस में लड़ती थी इसी लिए वो ज्यादा सिपाही दे नहीं सकते थे, तो उन्होंने कहा अपने पार्लियामेंट में कि हम इससे ज्यादा सिपाही आपको दे नहीं सकते हैं, जो 300 सिपाही है उन्हीं से आपको प्लासी का युद्ध जीतना होगा, तो रोबर्ट क्लाइव ने अपने दो जासूस लगाए, उसने कहा देखो युद्ध लड़ेंगे तो मारे जाएंगे, अब आप एक काम करो, उसने दो अपने साथियों को कहा कि आप जाओ और सिराजुद्दौला की आर्मी में पता लगाओ कि कोई ऐसा आदमी है क्या जिसको रिश्त दे दें, जिसको लालच दे दें और रिश्त के लालच में जो अपने देश से गद्दारी करने को तैयार हो जाए, ऐसा आदमी तलाश करो। उसके दो जासूसों ने बराबर सिराजुद्दौला की आर्मी में पता लगाया कि हां एक आदमी है, उसका नाम है मीर जाफर, अगर आप उसको रिश्त दे दो, तो वो हिंदुस्तान को बेंच डालेगा। इतना लालची आदमी है और अगर आप उसको कुर्सी का लालच दे दो, तब तो वो हिंदुस्तान की 7 पुश्तों को बेंच देगा और मीर जाफर क्या था, मीर जाफर ऐसा आदमी था जो रात दिन एक ही सपना देखता था कि एक न एक दिन मुझे बंगाल का नवाब बनना है और उस ज़माने में बंगाल का नवाब बनना ऐसा ही होता था जैसे आज के ज़माने में बहुत नेता ये सपना देखते हैं कि मुझे हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री बनना है, चाहे देश बेंचना पड़े, तो मीर जाफर के मन का ये जो लालच था कि मुझे बंगाल का नवाब बनना है, माने कुर्सी चाहिए, और मुझे पूंजी चाहिए, पैसा चाहिए, सत्ता चाहिए और पैसा चाहिए। ये दोनों लालच उस समय मीर जाफर के मन में सबसे ज्यादा प्रबल थे, तो उस लालच को रोबर्ट क्लाइव ने बराबर भांप लिया।

Mir Jafar

तो रोबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को चिट्ठी लिखी है, वो चिट्ठी दस्तावेजों में मौजूद है और उसकी फोटोकोपी

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