भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 77 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 21

मेरे पास है, उसने चिट्ठी में दो ही बातें लिखी है, देखो मीर जाफर अगर तुम अंग्रेजों के साथ दोस्ती करोगे, और ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ समझौता करोगे, तो हम तुमको युद्ध जीतने के बाद बंगाल का नवाब बनाएंगे और दूसरी बात कि जब आप बंगाल के नवाब हो जाओगे तो सारी की सारी सम्पत्ति आपकी हो जाएगी। इस सम्पत्ति में से 5 टका हमको दे देना, बाकि तुम जितना लूटना चाहो लूट लो। मीर जाफर चूँकि रात दिन ये ही सपना देखता था कि किसी तरह कुर्सी मिल जाए, और किसी तरह पैसा मिल जाए, तुरंत उसने वापस रोबर्ट क्लाइव को चिट्ठी लिखी और उसने कहा कि मुझे आपकी दोनों बातें मंजूर है, बताइए करना क्या है ? तो आखरी चिट्ठी लिखी है रोबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को कि आपको सिर्फ इतना करना है कि युद्ध जिस दिन शुरू होगा, उस दिन आप अपने 18000 सिपाहियों को कहिए की वो मेरे सामने सरेंडर कर दें बिना लड़े।

मीर जाफर ने कहा कि आप अपनी बात पे कायम रहोगे ? मुझे नवाब बनाना है आपको, तो रोबर्ट ने कहा कि बराबर हम अपनी बात पे कायम है, आपको हम बंगाल का नवाब बना देंगे, बस आप एक ही काम करो कि अपनी आर्मी से कहो, क्योंकि वो सेनापति था आर्मी का, तो आप अपनी आर्मी को आदेश दो कि युद्ध के मैदान में वो मेरे सामने हथियार डाल दे, बिना लड़े, मीर जाफर ने कहा कि ऐसा ही होगा और युद्ध शुरू हुआ 23 जून 1757 को। इतिहास की जानकारी के अनुसार २३ जून 1757 को युद्ध शुरू होने के 40 मिनट के अंदर भारतवर्ष के 18000 सिपाहियों ने मीर जाफर के कहने पर अंग्रेजों के 300 सिपाहियों के सामने सरेंडर कर दिया।

रोबर्ट क्लाइव ने क्या किया कि अपने 300 सिपाहियों की मदद से हिंदुस्तान के 18000 सिपाहियों को बंदी बनाया, और कलकत्ता में एक जगह है उसका नाम है फोर्ट विलियम, आज भी है, कभी आप जाइए, उसको देखिए उस फोर्ट विलियम में 18000 सिपाहियों को बंदी बना कर ले गया। 10 दिन तक उसने भारतीय सिपाहियों को भूखा रखा और उसके बाद ग्यारहवे दिन सबकी हत्या कराई और उस हत्या कराने में मीर जाफर रोबर्ट क्लाइव के साथ शामिल था, उसके बाद रोबर्ट क्लाइव ने क्या किया, उसने बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला की हत्या कराई मुर्शिदाबाद में, क्योंकि उस जमाने में बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद होती थी, कलकत्ता नहीं। सिराजुद्दौला की हत्या कराने में रोबर्ट क्लाइव और मीर जाफर दोनों शामिल थे। और नतीजा क्या हुआ ? बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला मारा गया, ईस्ट इंडिया कंपनी को भागने का सपना देखता था इस देश में वो मारा गया, और जो ईस्ट इंडिया कंपनी से दोस्ती वो बंगाल का नवाब हो गया, मीर

करने की बात करता था जाफर।

इस पूरे इतिहास की दुर्घटना को देखता हूँ। मैं कई बार ऐसा जाफर को मालूम नहीं था कि दोस्ती करेंगे तो इस देश की गुलामी आएगी ? मीर जाफर जानता था कि मैं मेरे कुर्सी के लालच में जो खेल खेल रहा हूँ उस खेल में इस देश को सैकड़ों वर्षों की गुलामी आ सकती है, ये वो जनता था और ये भी जानता था कि अपने स्वार्थ में, अपने लालच में मैं जो गद्दारी करने जा रहा हूँ इस देश के साथ उसके क्या दुष्परिणाम होंगे, वो भी उसको मालूम थे।

मैं एक विशेष नजर से सोचता हूँ कि क्या मीर ईस्ट इंडिया कंपनी से

इस्ट इंडिया कंपनी से