भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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मैं ऐसा सोचता हूँ कि हम गुलामी से आजाद हो जाते, क्योंकि 18000 सिपाही हमारे पास थे और 300 अंग्रेज सिपाहियों को मारना बिलकुल आसन् काम था हमारे लिए, हम 1757 में ही अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो जाते एक बात और दूसरी बात ये जो 200 वर्षों की गुलामी हमको झेलनी पड़ी 1757 से 1947 तक, और उस 200 वर्ष की गुलामी को भागने के लिए 6 लाख लोगों की जो कुर्बानियां हमको देनी पड़ी, वो बच गया होता। भगत सिंह, चंद्रशेखर, उधम सिंह, तात्या टोपे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चन्द्र बोस, ऐसे ऐसे नौजवानों की कुर्बानिया दी है ये कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे। सुभाष चन्द्र बोस तो आईपीएस टोपर थे, उधम सिंह चाहता तो आध्याशी कर सकता था, बड़े बाप का बेटा था। भगत सिंह और चंद्रशेखर की भी यही हैसियत थी, चाहते तो जिन्दगी की, जवानी की रंगरलियां मानते और अपनी नौजवानी को ऐसे फंदे में नहीं फ़साते, ये सारे वो नौजवान थे जिनका खून इस देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। 6 लाख ऐसे नौजवानों की कुर्बानियां जो हमने दी, वो नहीं देनी पड़ती और अंग्रेजों की जो यातनाएँ सही, जो अपमान हमने बर्दास्त किया, वो नहीं करना पड़ता अगर एक आदमी नहीं होता, मीर जाफ़र। लेकिन चूँकि मीर जाफ़र था, मीर जाफ़र का लालच था, कुर्सी का और पैसे का, उस लालच ने इस देश को 200 वर्ष के लिए गुलाम बना दिया।।।

और मैं आपसे यही कहने आया हूँ कि 1757 में तो एक मीर जाफ़र था आज हिंदुस्तान में हज़ारों मीर जाफ़र है। जो देश को वैसे ही गुलाम बनाने में लगे हुए है जैसे मीर जाफ़र ने बनाया था, मीर जाफ़र ने क्या किया था, विदेशों कंपनी को समझौता किया था बुला के, और विदेशी कंपनी से समझौता करने के चक्कर में उसे कुर्सी मिली थी और पैसा मिला था। आज जानते हैं हिंदुस्तान का जो नेता प्रधानमंत्री बनता है, हिंदुस्तान का जो नेता मुख्यमंत्री बनता है वो सबसे पहला काम जानते हैं क्या करता है ? प्रेस कॉन्फ़्रेंस करता है और कहता है विदेशी कंपनी वालो तुम्हारा स्वागत है, आओ यहाँ पर और बराबर इस बात को याद रखिए ये बात 1757 में मीर जाफ़र ने कही थी ईस्ट इंडिया कंपनी से कि अंग्रेजों तुम्हारा स्वागत है, उसके बदले में तुम इतना ही करना कि मुझे कुर्सी दे देना और पैसा दे देना। आज के नेता भी वही कह रहे हैं, विदेशी कंपनी वालों तुम्हारा स्वागत है।

और हमको क्या करना, हमको कुछ नहीं, मुख्यमंत्री बनवा देना, प्रधानमंत्री बनवा देना। 100 – 200 करोड़ रूपये की रिश्त दे देना, बेफ़ोर्स के माध्यम से हो के एनरों के माध्यम से हो। हम उसी में खुश हो जाएँगे, सारा देश हम आपके हवाले कर देंगे। ये इस समय चल रहा है। और इतिहास की वही दुर्घटना दोहराइ जा रही है जो 1757 में हो चुकी है। और मैं आपसे मेरे दिल का दर्द रहा रहा हूँ कि एक ईस्ट इंडिया कंपनी इस देश को 200 – 250 वर्ष इस देश को गुलाम बना सकती है, लूट सकती है तो आज तो इन मीर जफ़रों ने 8992 विदेशी कम्पनियों को बुलाया है। ।।

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