स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमित्रों राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी बातें कही जाएं वो कम है। कुछ चंद शब्दों मे उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है। ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते हैं जिन्होंने राजीव दीक्षित जी को समझा है। फिर भी हमने कुछ को कुछ शब्दों का रूप देने का शुरु करने से पहले हम आपको ये कि जितना परिचय राजीव भाई का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये गये कार्यों का मात्र 1% से भी कम ही होगा। उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके व्याख्यानों को सुनना पड़ेगा।।
गहराई से सुना और प्रयास कर उनके परिचय प्रयत्न किया है। परिचय बात स्पष्ट करना चाहते हैं हम आपको बताने का
राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ था। उन्होंने प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक स्कूल से प्राप्त की। इसके उपरान्त उन्होंने इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीट्यूट से बी० टेक० और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) से एम० टेक० की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव भाई ने कुछ समय भारत CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) में कार्य किया। तत्पश्चात् वे किसी Research Project में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया।।
श्री राजीव जी इलाहाबाद के जे.के इंस्टीट्यूट से बी.टेक. की शिक्षा लेते समय ही “आजादी बचाओ आंदोलन” से जुड़ गए जिसके संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित विभाग के मुख्य शिक्षक थे। इसी संस्था में राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था में श्री अभय प्रताप, संत समीर, केशर जी, राम धीरज जी, मनोज त्यागी जी तथा योगेश कुमार मिश्र जी शोधकर्ता अपने अपने विषयों पर शोध कार्य किया करते थे जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित “नई आजादी उद्घोष” नामक मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करते थे और राजीव भाई के ओजस्वी वाणी से देश के कोने-कोने में व्याख्यानों की एक विशाल श्रंखलाबद्ध वैचारिक क्रान्ति आने लगी राजीव जी ने अपने प्रवक्ता पद के दायित्वों को एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में निभाया जो कि अतुल्य है।
बचपन से ही राजीव भाई देश की समस्याओं को जानने की गहरी रुची थी। प्रति मास 800 रुपये का खर्च उनका मैगजीनों, सभी प्रकार के अखबारों को पढ़ने में हुआ करता था। वे अभी नौवी कक्षा में ही थे कि उन्होंने अपने इतिहास के अध्यापक से एक ऐसा सवाल पूछा जिसका जवाब उस अध्यापक के पास भी नहीं था जैसा कि आप जानते हैं कि हमको इतिहास की किताबों में पढ़ाया जाता है कि अंग्रेजों का भारत के राजा से प्रथम युद्ध 1757 में
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