भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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प्लासी के मैदान में रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला से हुआ था। उस युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव ने सिराजुद्दौला को हराया था और उसके बाद भारत गुलाम हो गया था। राजीव भाई ने अपने इतिहास के अध्यापक से पूछा कि सर मुझे ये बताइए कि प्लासी के युद्ध में अंग्रेजों की तरफ से कितने सिपाही थे लड़ने वाले? तो अध्यापक कहते थे कि मुझको नहीं मालूम। तो राजीव भाई ने पूछा क्यों नहीं मालूम? तो कहते थे कि मुझे किसी ने नहीं पढ़ाया तो मैं तुमको कहाँ से पढ़ा दूँ।

तो राजीव भाई ने उनको बराबर एक ही सवाल पूछा कि सर आप जरा ये बताईये कि बिना सिपाही के कोई युद्ध हो सकता है ?? तो अध्यापक ने कहा नहीं। तो फिर राजीव भाई ने पूछा फिर हमको ये क्यों नहीं पढ़ाया जाता है कि युद्ध में कितने सिपाही थे अंग्रेजों के पास? और उसके दूसरी तरफ एक और सवाल राजीव भाई ने पूछा था कि अच्छा ये बताईये कि अंग्रेजों के पास कितने सिपाही थे ये तो हमको नहीं मालूम सिराजुद्दौला जो लड़ रहा था हिंदुस्तान की तरफ से उनके पास कितने सिपाही थे? तो अध्यापक ने कहा कि वो भी नहीं मालूम। तो खैर इस सवाल का जवाब बहुत बड़ा और गंभीर है कि आखिर इतना बड़ा भारत मुठी भर अंग्रेजों का गुलाम कैसे हो गया ?? यहाँ लिखेंगे तो बात बहुत बड़ी हो जाएगी। इसका जवाब आपको राजीव भाई के एक व्याख्यान जिसका नाम आजादी का असली इतिहास में मिल जाएगा।

तो देश की आजादी से जुड़े ऐसे सैकड़ों-सैकड़ों सवाल दिन रात राजीव भाई के दिमाग में घूमते रहते थे। इसी बीच उनकी मुलाकात प्रो० धर्मपाल नाम के एक इतिहासकार से हुई जिनकी किताबें अमेरिका में पढ़ाई जाती है लेकिन भारत में नहीं।

धर्मपाल जी को राजीव भाई अपना गुरु भी के काफी सवालों का जवाब ढूँढ़ने में बहुत भाई को भारत के बारे में वो दस्तावेज की लाइब्रेरी हाउस आफ कामन्स में रखे वर्णन किया था कि कैसे उन्होंने भारत गुलाम बनाया। राजीव भाई ने उन सब दस्तावेजों का बहुत अध्ययन किया और ये जानकर उनके रोंगटे खड़े हो गए कि भारत के लोगों को भारत के बारे में कितना गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है। फिर सच्चाई को लोगों के सामने लाने के लिए राजीव भाई गाँव, गाँव शहर शहर जाकर व्याख्यान देने लगे। और साथ-साथ देश की आजादी और देश के अन्य गंभीर समस्याओं का इतिहास और उसका समाधान तलाशने में लगे रहते।

मानते हैं, उन्होंने राजीव भाई मदद की। उन्होंने राजीव उपलब्ध करवाए जो इंग्लैंड हुए थे जिनमें अंग्रेजों ने पूरा

इलाहबाद में पढ़ते हुए उनके एक खास मित्र हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी उनके पिता जी इलाहबाद हार्डकोर्ट में वकील थे। तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर उनसे देश की आजादी से जुड़ी रहस्यमयी बातों पर वार्तालाप किया करते थे। तब राजीव भाई को देश की आजादी के विषय में बहुत ही गंभीर जानकारी प्राप्त हुई। कि 15 अगस्त 1947 को देश में कोई आजादी नहीं आई। बल्कि 14 अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज

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