स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमाउंट बेटन और नेहरू के बीच के समझौता हुआ था जिसे सत्ता का हस्तांतरण (transfer of power agreement) कहते हैं । इस समझौते के अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही इस देश में चलेंगे ॥ और क्योंकि आजादी की लड़ाई में पूरे देश का विरोध अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड़ कर जाएगी और उसके साथ जो 126 कंपनियां और भारत को लूटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत में व्यापार करेगी । लूटती रहेगी । आज उन विदेशी कंपनियों की संख्या बढ़ कर 8992 को पार कर गई है ॥ (इस बारे में और अधिक जानकारी उनके व्याख्यानों में मिलेगी)
एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर भारत में अंग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी लूटा करती थी । आजादी के बाद भी भारत में वैसे ही गौ हत्या होगी जैसे अंग्रेजों के समय होती थी, तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ?? तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन विदेशी कंपनियों और भारत में चल रहे अंग्रेजी कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया जैसा किसी समय में बाल गंगाधर तिलक ने अंग्रेजों के खिलाफ किया था ॥ अपने राष्ट्र में पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति के रूप में खड़ा करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया। वो गाँव-गाँव, शहर शहर घूम कर लोगों को लोगों को भारत में चल रहे अंग्रेजी कानून, आधी अधूरी आजादी का सच, विदेशी कंपनियों की भारत में लूट आदि विषयों के बारे में बताने लगे । सन् 1999 में राजीव के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने सम्बूचे देश में धूम मचा दी थी॥ 1984 में जब भारत में भोपाल गैस कांड हुआ तब राजीव भाई ने इसके पीछे के षड्यंत्र का पता लगाया और ये खुलासा किया कि ये कोई घटना नहीं थी बल्कि अमेरिका द्वारा किया गया एक परीक्षण था (जिसकी अधिक जानकारी आपको उनके व्याख्यानों में मिलेगी ॥) तब राजीव भाई यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया ।
इसी प्रकार 1995-96 में टिहरी बाँध के बनने के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं ॥ और इसी प्रकार 1999 में उन्होंने राजस्थान के कुछ गांवसियों साथ मिलकर एक शराब बनाने वाली कंपनी जिसको सरकार ने लाइसेन्स दिया था और वो कंपनी रोज जमीन की नीचे बहुत अधिक मात्रा में पानी निकाल कर शराब बनाने वाली थी उस कंपनी को भगाया ॥ 1991 भारत में चले ग्लोबलाइजेशन, लिब्रलाइजेसशन को राजीव भाई स्वदेशी उद्योगों का सर्वनाश करने वाला बताया और पूरे आंकड़ों के साथ घंटो-घंटो इस पर व्याख्यान दिये और स्वदेशी व्यापारियों को इसके खिलाफ जागरूक किया ॥ फिर 1994 में भारत सरकार द्वारा किए WTO समझौते का विरोध किया क्योंकि ये समझौता भारत को एक बहुत बड़ी आर्थिक गुलामी की और धकेलने वाला था । इस समझौते में सैकड़ों ऐसे शर्त सरकार ने स्वीकार कर ली थी जो आज भारत में
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