स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्तान में जिन लोगो को ज्ञान हो जाता है उनकी डिग्री कोई नहीं पूछता है। जैसे- सन्त ज्ञानेश्वर की डिग्री किसी ने नहीं पूछी, समर्थ गुरु रामदास की डिग्री कभी देखी आपने, छत्रपति शिवाजी महाराज की डिग्री पूछी आप ने, शम्भा जी महाराज की डिग्री पूछी आपने, तुकड़ो जी महाराज की डिग्री कभी पूछी आपने। इसलिए जब व्यक्ति को ज्ञान हो जाता है तो हम उसके ज्ञान को पूजते हैं उसकी डिग्री कभी नहीं पूछते हैं। डिग्री तभी तक पूछी जाती है जब तक उसके ज्ञान का आपको पता नहीं है।
दुनिया में किसी की भी पूजा हुई है, समाज ने किसी को भी महान बनाया है तो बिना डिग्री के हुई है। इन्दिरा गाँधी 8 वी कक्षा में फेल थी। इन्दिरा गाँधी रवीन्द्र नाथ टैगोर के गुरुकुल में पढ़ती थी और 8वीं में दो बार फेल हुई और वह भारत की 17 वर्ष तक प्रधानमंत्री रहीं। इन्दिरा गाँधी की डिग्री को कोई नहीं पूछता है। उसने जो किया है उसको पूछते हैं। ज्ञान हमेशा डिग्री से बड़ा होता है। ऐसा पूरी दुनिया में होता है।
धीरू भाई अम्बानी की डिग्री, 9वीं फेल थे, उनके पिता ने स्कूल से निकाल दिया और उससे पूछा तू क्या करेगा तो धीरू भाई ने कहा मैं पैसा कमाऊंगा तो धीरू भाई के पिता जी ने अपने दोस्त के पेट्रोल पम्प पर उनको नौकरी पर रखवा दिया, गुजरात में जूनागढ़ नाम के शहर में। वही धीरू भाई अम्बानी पेट्रोल भरा करते थे और धीरू भाई का आज लाखों करोड़ रुपये का एम्पायर है। धीरू भाई नौवीं फेल थे लेकिन उनके नीचे काम करने वाले लोग बड़े-बड़े इंजीनियर, पी.एच.डी., एम.डी., जैसी बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाले लोग हैं, नौकर की तरह। ऐसे ही घनश्याम दास बिड़ला चौथी फेल थे और उसके बाद स्कूल छोड़कर व्यवसाय में लग गये और वो भी लाखों करोड़ के एम्पायर के मालिक हैं। ऐसे ही जमशेद जी टाटा एक भी क्लास पढ़ने नहीं गया। कभी स्कूल नहीं गये। उनको घर पर एक टीचर पढ़ाता था। आज उनका एम्पायर लाखों करोड़ों का है।
दुनिया में डिग्री लेकर कोई महान हुआ है ऐसे दो-चार ही मिलेंगे। बिना डिग्री के बहुत ऊँचाई पर गये ऐसे सैकड़ों लोग हैं। पुणे में किलोस्कर कंपनी है, इसका मूल संस्थापक 5वीं पास है। डिग्री का महत्व है नौकरी पाने के लिए, सिपाही होने के लिए, क्लर्क होने के लिए, नौकर बनने के लिए। अपने बच्चे को यदि नौकर बनाना है तो डिग्री पर ध्यान दीजिए और यदि समाज में कोई ऐसा स्थान दिलाना है जिसकी सब इज्जत करें तो ज्ञान को महत्व दीजिए। इसलिए 10-15 साल महत्वपूर्ण समय है जो स्कूलों में एवं उनके होमवर्क में व्यर्थ चला ता है। इसमें अपने बच्चों को वेद पढ़ाइयें, उपनिषद पढ़ाइये, गीता पढ़ाइये, भारत के और दूसरे शास्त्रों को पढ़ाइयें। उसके साथ में 10वीं-12वीं की परीक्षा दिलवाइये, नंबर के लिए नहीं बल्कि डिग्री के लिए। इसके बाद उनको ज्ञान सिखाने की कोशिश करें। सर्टिफिकेट ज्यादातर 10वीं और 12वीं का ही लगता है। उसके पहले का कोई नहीं पूछता है तो 5वीं, 6वीं, 7वीं, 8वीं की डिग्री के पीछे पड़ कर टाइम क्यों खराब करना।
अभी मैं जो काम कर रहा हूँ वह डिग्री वालों ने नहीं सिखाया है। मैंने स्वधाय से सीखा है। जो मैंने स्वधाय से सीखा है वही मुझे काम आ रहा है। डिग्री वाला तो कभी काम नहीं आ रहा है।
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