स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहैं। जानवरों का गोबर और गौमूत्र गाँव में आसानी से मिल जाता है। गोबर इकट्ठा करना तो बहुत आसान है। जानवरों का मूत्र इकट्ठा करना भी आसान है।
देशी गौमाता या देशी बैल का मूत्र कैसे इकट्ठा करें?
सभी देशी गौमाता या देशी बैल मूत्र देते हैं। आप ऐसा करिए कि उनको बांधने का जो स्थान है वो थोड़ा पक्का बना दीजिए, सीमेंट या पत्थर लगा दीजिए और स्थान को थोड़ा ढाल दे दीजिए और उसमें एक नाली बना दीजिए और बीच में एक खड्डा बना दीजिए। तो जानवर जो भी मूत्र करेंगे वो सब नाली में आकर खड़े में इकट्ठा हो जाएगा। अब देशी गौमाता या देशी बैल के मूत्र की एक विशेषता है कि इसकी कोई एक्सपायरी डेट नहीं है। 3 महीने, एक साल, दो साल, पाँच साल, दस साल कितने भी दिन पड़ा रहे खड़े में, वो खराब बिल्कुल नहीं होता। इसलिए बिल्कुल निश्चित तरीके से आप इसका इस्तेमाल करें, मन में हिचक मत लायें कि ये पुराना है या नया। हमने तो ये पाया है कि जितना देशी गौमाता या देशी बैल का मूत्र पुराना होता जाता है उसकी गुणवत्ता उतनी ही अच्छी होती जाती है। ये जितने भी मल्टीनेशनल कंपनियों के जंतुनाशक है उन सबकी एक्सपायरी डेट है और उसके बाद भी कीड़े मरते नहीं है और किसान उसको कई बार चख कर देखते हैं कि कहीं नकली तो नहीं है, तो किसान मर जाते हैं, कीड़े नहीं मरते हैं तो मल्टीनेशनल कम्पनियों के कीटनाशक लेने से अच्छा है देशी गौमाता या देशी बैल के मूत्र का उपयोग करना। तो इसको खाद में इस्तेमाल करिए ये एक तरीका है। लगातार तीन साल इस्तेमाल करने पर आपके खेत की मिट्टी को एकदम पवित्र और शुद्ध बना देगा, मिट्टी में एक कण भी जहर का नहीं बचेगा, और उत्पादन भी पहले से अधिक होगा। फसल का उत्पादन पहले साल कुछ कम होगा परन्तु खाद का खर्चा एक ही झटके में कम हो जायेगा और उत्पादन भी हर साल बढ़ता जायेगा।
बाजार से किसी विदेशी कम्पनी का 15000 रूपए लीटर का कीटनाशक लाने से अच्छा है इन देसी गौमाता या देसी बैले के मूत्र से ही कीटनाशक बना सकते हैं। अगर किसी फसल में कोई कीट या जंतु लग गया, उसको खत्म करना है, मारना है तो उसके लिए एक सूत्र आप लिख लीजिए कि कीटनाशक बनाना भी बेहद आसान है, कोई भी किसान भाई अपने घर में बना सकते हैं।
कीटनाशक बनाने के लिए क्या करना पड़ता है ?
एक एकड़ खेत के लिए अगर कीटनाशक तैयार करना है तो :-
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- 20 लीटर किसी भी देसी गौमाता या देसी बैले का मूत्र चाहिए।
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- 20 लीटर मूत्र में लगभग ढाई किलो ( आधा किलो कम या ज्यादा हो सकता है ) नीम की पत्ती को पीसकर उसकी चटनी मिलाइए, 20 लीटर मूत्र में। नीम के पत्ते से भी अच्छा होता है नीम की निम्बोली की चटनी।
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- इसी तरह से एक दूसरा पत्ता होता है धतूरे का पत्ता। लगभग ढाई किलो धतूरे के पत्ते की चटनी मिलाइए उसमें।
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- एक पेड़ होता है जिसको आक या आँकड़ा कहते हैं, अर्कमदार कहते हैं आयुर्वेद में। इसके भी पत्ते लगभग ढाई किलो लेकर इसकी चटनी बनाकर मिलाए।
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- जिसको बेलपत्री कहते हैं, जिसके पत्र आप शंकर भगवान के उपर चढ़ाते हैं। बेलपत्री या विल्वपत्रा के पत्ते की ढाई किलो की चटनी मिलाए उसमें।
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- फिर सीताफल या शरीफा के ढाई किलो पत्तों की चटनी मिलाए उसमें।
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- आधा किलो से 750 ग्राम तक तम्बाकू का पाऊडर और डाल देना।
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