स्वदेशी उत्पाद बनाने की विधि (भाग 2)
Swadeshi Utpad Banane Ki Vidhi (Bhag 2)
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 2 · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविधि- उपरोक्त सामग्री के मिश्रण को आगे दी गयी जड़ी बूटियों से तैयार किए हुए काढ़े के साथ संसाधित किया जाता है। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, गिलोय या गुडूची, सर्पगंधा और जटामांसी। 1 गोली प्रतिदिन दो बार।
लाभ -
दिव्य मुक्ता वटी उच्च रक्तचाप को संतुलित करने की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक औषधि है। मुक्ता वटी अवसाद में भी लाभदायक है और यह मानसिक उत्तेजना और चिड़चिड़ेपन को शांत करती है। ज्यादातर लोग तनाव से प्रेरित उच्च रक्तचाप से ग्रसित होते हैं। इस मामले में यह अधिक प्रभावी है। हालांकि, मुक्ता वटी को सर्पगंधा और जटामांसी के साथ भी संसाधित किया जाता है, जो की एंटीहाइपरटेन्सिव (उच्चरक्तदाबरोधी) जड़ी बूटियां हैं।
❖ वातारि चूर्ण
घटक: -
| 1. सोठ | - | 1 ग्राम |
|---|---|---|
| 2. विधारा | - | 1 ग्राम |
| 3. अक्षगंधा | - | 1 ग्राम |
| 4. मेथी | - | 1 ग्राम |
| 5. कुटकी | - | 1 ग्राम |
विधि -
सभी घटकों को कूटकर, मिलाकर तैयार करें।
वातारि चूर्ण के लाभ एवं उपयोग
- • दिव्य वातारि चूर्ण जोड़ो और माशपेशियों के दर्द के लिए बहुत ही लाभकारी है यह बाजार में उपलब्ध उन कुछ औषधियों में से एक है जो गठिये का बेहतरीन उपचार करती हैं और गठिये के रोगियों
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