स्वदेशी उत्पाद बनाने की विधि (भाग 2)
Swadeshi Utpad Banane Ki Vidhi (Bhag 2)
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 2 · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
विधि- उपरोक्त सामग्री के मिश्रण को आगे दी गयी जड़ी बूटियों से तैयार किए हुए काढ़े के साथ संसाधित किया जाता है। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, गिलोय या गुडूची, सर्पगंधा और जटामांसी। 1 गोली प्रतिदिन दो बार।
लाभ -
दिव्य मुक्ता वटी उच्च रक्तचाप को संतुलित करने की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक औषधि है। मुक्ता वटी अवसाद में भी लाभदायक है और यह मानसिक उत्तेजना और चिड़चिड़ेपन को शांत करती है। ज्यादातर लोग तनाव से प्रेरित उच्च रक्तचाप से ग्रसित होते हैं। इस मामले में यह अधिक प्रभावी है। हालांकि, मुक्ता वटी को सर्पगंधा और जटामांसी के साथ भी संसाधित किया जाता है, जो की एंटीहाइपरटेन्सिव (उच्चरक्तदाबरोधी) जड़ी बूटियां हैं।
❖ वातारि चूर्ण
घटक: -
| 1. सोठ | - | 1 ग्राम |
|---|---|---|
| 2. विधारा | - | 1 ग्राम |
| 3. अक्षगंधा | - | 1 ग्राम |
| 4. मेथी | - | 1 ग्राम |
| 5. कुटकी | - | 1 ग्राम |
विधि -
सभी घटकों को कूटकर, मिलाकर तैयार करें।
वातारि चूर्ण के लाभ एवं उपयोग
- • दिव्य वातारि चूर्ण जोड़ो और माशपेशियों के दर्द के लिए बहुत ही लाभकारी है यह बाजार में उपलब्ध उन कुछ औषधियों में से एक है जो गठिये का बेहतरीन उपचार करती हैं और गठिये के रोगियों
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को सामान्य जीवन जीने के लिए मदद करते हैं। इससे जोड़ो के अन्य रोगों में भी रहत मिलती है।
- • कई महिलायों को रजोनिवृत्ति के बाद ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी हो जाती है जिसमे भी जोड़ो में समस्या आ जाती है, दिव्य वातारि चूर्ण इस समस्या की रोगग्राम के लिए भी बहुत उपयोगी है।
- • दिव्य वातारि चूर्ण उन बूढ़े लोगों के लिए उपयोगी है जो ठीक से चल पाने में भी असमर्थ हैं क्योंकि उम्र बढ़ने के कारण उनके जोड़ कमजोर हो चुके होते हैं। यह चूर्ण हड्डियों और जोड़ो को मजबूत बनाता है, ताकि वो अपने सामान्य काम कर सके।
- • दिव्य वातारि चूर्ण जोड़ो तक पोषक तत्व पहुंचाता है जिससे इससे सम्बंधित समस्याएं न केवल कम होती हैं बल्कि शरीर को भी ऊर्जा मिलती है।
- • इन सब फायदों के अलावा यह चूर्ण शरीर के अन्य दर्दों जैसे कमर दर्द, पीठ कर दर्द और सभी तरह से बात रोगों से छुटकारा भी दिलाता है।
❖ दिव्य पेय हर्बल टी के घटक
घटक: -
| 1. | छोटी इलाइची | - | 3 ग्राम |
|---|---|---|---|
| 2. | बड़ी इलाइची | - | 4 ग्राम |
| 3. | दालचीनी | - | 1 ग्राम |
| 4. | लौंग | - | 4 ग्राम |
| 5. | सफेद चन्दन | - | 1 ग्राम |
| 6. | रक्त चन्दन | - | 3 ग्राम |
| 7. | जावित्री | - | 4 ग्राम |
| 8. | जायफल | - | 4 ग्राम |
| 9. | काली मिर्च | - | 1 ग्राम |
| 10. | गुलाब फूल | - | 3 ग्राम |
| 11. | कमल फूल | - | 3 ग्राम |
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| 12. | अक्षगंधा | - | 3 ग्राम |
|---|---|---|---|
| 13. | सोमलता | - | 3 ग्राम |
| 14. | गजवान | - | 2 ग्राम |
| 15. | सौफ | - | 2 ग्राम |
| 16. | चित्रक | - | 3 ग्राम |
| 17. | वासा | - | 3 ग्राम |
| 18. | बनपशा | - | 3 ग्राम |
| 19. | चव्य | - | 3 ग्राम |
| 20. | सौठ | - | 3 ग्राम |
| 21. | गिलोय | - | 3 ग्राम |
| 22. | मुलेठी | - | 3 ग्राम |
| 23. | तेजपत्ता | - | 2 ग्राम |
| 24. | गोरखपान | - | 2 ग्राम |
| 25. | आज्ञाघास | - | 4 ग्राम |
| 26. | भूमिआमला | - | 4 ग्राम |
| 27. | पुनर्नवा | - | 4 ग्राम |
| 28. | बला | - | 2 ग्राम |
| 29. | सर्पुनखा | - | 2 ग्राम |
| 30. | ब्राही | - | 4 ग्राम |
| 31. | शंखपुष्पी | - | 4 ग्राम |
| 32. | वनतुलसी | - | 5 ग्राम |
| 33. | अर्जुन | - | 3 ग्राम |
विधि-
इसको बनाने का तरीका साधारण चाय बनाने के जैसा ही हैं। एक कप पानी में एक टीस्पून दिव्य पेय हर्बल टी का एक चम्मच डाल कर इसे धीमी आंच पर पकाएं, इसे पांच से सात मिनट्स पकाएं और इसके बाद इसमें दूध और चीनी डालें और उसके बाद छान कर पिएं।
दिव्य पेय के लाभ एवं उपयोग -
- • खासी-जुकाम में लाभदायक
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- • दिव्य पेय हर्बल टी जड़ी-बूटियों का एक ऐसा मिश्रण हैं, जो खासी जुकाम और उसमे होने वाली परेशानियों को दूर करने में सहायक है।
- • पेट के रोगों में असरकारक
- • यह एक ऐसा पेय हैं जो पेट की तकलीफो से राहत प्रदान करती है और उनकी रोकथाम में सहायक हैं।
- • पाचन की समस्यायों से राहत
- • इस हर्बल चाय से पाचन क्षमता बढ़ती है, इसके अलावा यह साँस से सम्बंधित समस्यायों को भी दूर करती है।
- • वजन कम करने के लिए उपयोगी
- • इसके मौजूद जड़ी- बूटियां शरीर की चर्बी को कम करती हैं और वजन को कम करने में उपयोगी हैं
- • मानसिक परेशानियों के लिए उपयोगी
- • इस चाय में अक्षगंधा ,ब्राह्मी और शंखपुष्पी जैसी जड़ी-बूटियां हैं जो मानसिक बीमारियों, तनाव व अवसाद को दूर करती हैं और व्यक्ति को स्वस्थ रखती हैं।
- • इम्युनिटी बढ़ाती हैं
- • हर्बल चाय इम्युनिटी को बढ़ाती हैं और शरीर के अंगो को भी मजबूत करती हैं। यह शरीर से हानिकारक ऑक्सीडेंट को शरीर से निकालती हैं।
❖ यौवनामृत वटी
घटक: -
| 1. अक्षगंधा | - | 12 मिलीग्राम |
|---|---|---|
| 2. कोंच | - | 12 मिलीग्राम |
| 3. बला | - | 12 मिलीग्राम |
| 4. शतावर | - | 8.25 मिलीग्राम |
| 5. सफ़ेद मूसली | - | 12 मिलीग्राम |
| 6. जावेत्री | - | 12 मिलीग्राम |
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- | जायफल | - | 17.50 मिलीग्राम ---|---|---|---
- | कुचला शुद्ध | - | 2 मिलीग्राम
- | अकरकरा | - | 12 मिलीग्राम
- | जुंदवेस्तर | - | 12 मिलीग्राम
- | बबूल | - | 1.75 मिलीग्राम
- | स्वर्ण भस्म | - | 0.25 मिलीग्राम
- | प्रवाल पिस्टी | - | 0.25 मिलीग्राम
- | वंग भस्म | - | 5.50 मिलीग्राम
- | शिलाजीत शुद्ध | - | 5.50 मिलीग्राम
विधि -
सभी सामग्री को सुखाकर, कूटकर डिब्बे में भर लें।
लाभ एवं प्रयोग -
दिव्य यौवनामृत वटी में सभी घटकों का पुरुषों के यौन स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।
❖ अर्जुन काथ
- | अर्जुन छाल | - | 10 ग्राम ---|---|---|---
विधि - 400 मिलीलीटर पानी में पाँच से दस ग्राम दिव्य अर्जुन काथ पाउडर डालें और उसे पकाएं, इसे तब तक पकाएं जब तक की इस मिश्रण की मात्रा कम हो कर 100 मिलीलीटर न रह जाये। अब इस मिश्रण को छान लें और पिये। इसका सेवन दिन में दो बार खाली पेट करना चाहिए। 1) सुबह उठ कर खाली पेट 2) रात के खाने से एक घंटे पहले।
हृदय से सम्बंधित रोगों के लिए
- • हृदय के रोगों जैसे उच्च कोलोस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और हार्ट अटैक की रोकथाम के लिए दिव्य अर्जुन काथ बेहतरीन औषधि
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हैं इसके अलावा इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां हृदय की माँसपेशियों का पोषण करता हैं ताकि वो सही से काम कर सके।
- • कमजोर दिल के लिए
- • कमजोर दिल के रोगियों के लिए यह औषधि बहुत लाभदायक है।
- • हार्ट अटैक की रोकथाम के लिए
- • दिव्य अर्जुन काथ धमनियों में जमी वसा को कम करने में मदद करता हैं जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती हैं।
- • इन सब लाभों के अलावा इसमें मौजूद अर्जुन छाल किडनी से पथरी को बाहर निकालने, दांतों को चमकाने या मजबूत बनाने और अगर इसका सेवन दूध में डाल कर किया जाये तो लगभग हर बीमारी में यह लाभदायक है।
❖ दिव्य उदरकल्प चूर्ण
घटक -
| 2. सोनामुखी | - | 1.5 ग्राम |
|---|---|---|
| 3. सौंफ | - | 0.5 ग्राम |
| 4. हरीतकी छोटी | - | 1 ग्राम |
| 5. सेंधा नमक | - | 0.5 ग्राम |
| 6. सोंठ | - | 0.5 ग्राम |
| 7. गुलाब फूल | - | 0.5 ग्राम |
| 8. काला दाना | - | 0.5 ग्राम |
विधि -
सभी घटकों को सुखाकर पीसकर, डिब्बी में भरे।
लाभ एवं उपयोग -
- • दिव्य उदरकल्प चूर्ण आंतों से सम्बंधित रोगों को दूर करने में सहायक है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से आंतरिक
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प्रणाली से गंदगी बाहर निकलती है और इससे खाना पूरी तरह से पच जाता है।
- • दिव्य उदरकल्प चूर्ण पेट से सम्बंधित रोगों की रोकथाम के लिए बहुत उपयोगी है जैसे पेट में होने वाले दर्द से और पेट की गैस को यह चूर्ण पूरी तरह से खत्म करता है।
- • यह चूर्ण पेट की सूजन को कम करता है और शरीर के सारे अंगों को ऊर्जा प्रदान करता है इसके अलावा यह शरीर की पाचन क्रिया को भी सुचारू बनाये रखता है।
- • दिव्य उदरकल्प चूर्ण कुदरती तरीके से शरीर की प्रणाली की सफाई करता है और शरीर के लिए हानिकारक द्रव्यों को बाहर निकालता है, वो भी शरीर के बाकि के अंगों को बिना हानि पहुंचाये।
- • दिव्य उदरकल्प चूर्ण पुरानी कब्ज और बबासीर जैसे रोगों के लिए भी बहुत ही उपयोगी औषधि है। इसमें मौजूद जड़ी-बूटियां इन रोगों के लिए रामबाण दवा है।
- • यह चूर्ण दस्त, पेट फूलना, एसिडिटी, खट्टी डकार जैसी बिमारियों से भी राहत प्रदान करता है।
औषधीय मात्रा निर्धारण एवं व्यवस्था
दिव्य उदरकल्प चूर्ण की दो-पाँच ग्राम मात्रा रोजाना लेने की सलाह दी जाती है। इसे दिन में एक बार रात को सोते समय लेना चाहिए। इस चूर्ण का सेवन हलके गर्म दूध या पानी किसी के साथ भी लेना बेहतर है। इसका सेवन आप कितने भी लंबे समय तक कर सकते हैं क्योंकि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।
❖ शिलाजीत रसायन वटी
घटक: -
| 1. अक्षगंधा | - | 60 मिलीग्राम |
|---|---|---|
| 2. त्रिफला चूर्ण | - | 60 मिलीग्राम |
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| 3. भूमि आमला | - | 60 मिलीग्राम |
|---|---|---|
| 4. शुद्ध शिलाजीत | - | 120 मिलीग्राम |
विधि -
सभी घटकों को सुखाकर, पीसकर तैयार करें।
औषधीय लाभ एवं प्रयोग (Benefits & Uses) -
दिव्य शिलाजीत रसायन वटी के सभी घटकों का प्रभाव मर्दाना रोगों में दिखाई पड़ता है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करती है। यह पुरुषों नई ऊर्जा का संचार करती है और मर्दाना शक्ति की वृधि करती है। यह पुरुषों के स्वास्थ्य के उपयोगी व हितकारी आयुर्वेदिक औषधि है। यह पुरुषों के रोगों के उपचार के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है।
सेवन विधि
- • दवा लेने का उचित समय (कब लें?) - सुबह और शाम
- • दिन में कितनी बार लें? - 2 बार
- • अनुपान - गुनगुने पानी या दूध के साथ
- • उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) कम से कम 3 महीने चिकित्सक की सलाह लें
❖ Dr Ortho Oil के घटक द्रव्य
(Ingredients)
घटक: -
| 1. अलसी तेल | - | 5 मिलीलीटर |
|---|---|---|
| 2. कपूर तेल | - | 5 मिलीलीटर |
| 3. पुदीना तेल | - | 5 मिलीलीटर |
| 4. चीड़ तेल | - | 8 मिलीलीटर |
| 5. गंधपुरा तेल | - | 8 मिलीलीटर |
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| 6. निर्गुच्छी तेल | - | 2 मिलीलीटर |
|---|---|---|
| 7. ज्योतिष्मती तेल | - | 2 मिलीलीटर |
| 8. तिल का तेल | - | 65 मिलीलीटर |
विधि- सभी प्रकार के तेलों को आपस में मिलाकर डिब्बी में भर कर प्रयोग करें।
डा. ऑर्थो तेल (Dr Ortho Oil) की मालिश निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है:
- • घुटने का दर्द
- • पीठ दर्द
- • मांसपेशियों में दर्द और जकड़न
- • जोड़ों के दर्द और जकड़न
- • ऑस्टियोआर्थराइटिस (अस्थिसंधिशोथ)
- • गठिया
- • कंधे में दर्द
- • गृध्रसी या कटिस्नायुशूल (Sciatica)
- • गर्दन का दर्द
❖ दिव्य धारा के घटक
घटक: -
| 1. पिपरमिंट आयल | - | 1मिलीलीटर |
|---|---|---|
| 2. देसी कपूर | - | 1 ग्राम |
| 3. अजवायन सत | - | 1 ग्राम |
| 4. लौंग तेल | - | 0.50 मिलीलीटर |
| 5. नीलगिरी तेल | - | 1.50 मिलीलीटर |
विधि -
सभी को आपस में मिलाकर, दिव्य धारा तैयार करें।
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दिव्य धारा के लाभ एवं प्रयोग
दिव्य धारा में सभी घटकों का सिर दर्द, खोंसी या जुकाम पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे हैं।
- • दिव्य धारा शरीर के विभिन्न दर्द जैसे सिर का दर्द, दांत का दर्द, पेट का दर्द को दूर करने में सहायक है, इसके अलावा यह नाक से खून निकलने की समस्या और त्वचा की किसी भी तरह की समस्या जैसे की संक्रमण से यह राहत देती है। यह औषधि माइग्रेन के लिए भी लाभदायक है।
- • दिव्य धारा का मुख्य घटक पुदीना है इसीलिए यह पेट से सम्बंधित सभी रोगों को रोकथाम के लिए बहुत असरदार है। इसके प्रयोग से पेट दर्द , कब्ज ,पेट का भारीपन, अम्लता, गैस में राहत मिलती है और पाचन क्रिया सही रहती है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है और अपच नहीं होने देती। दिव्य धारा का प्रयोग बाहरी तरीके से ही किया जाता है।
- • दिव्य धारा सर्दी जुकाम और खोंसी में भी राहत देती है। जुकाम में होने वाली समस्याओं जैसे सिर दर्द, गले की खराश और दर्द, बहती हुई नाक, संक्रमण, आँखों में जलन आदि को दूर करने में भी सहायक है। मांसपेशियों के दर्द में भी दिव्य धारा के प्रयोग से लाभ मिलता है और मांसपेशियों की अकड़न में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
- • दिव्य धारा हैजा और पुराने अस्थमा जैसे रोगों की रोकथाम के लिए असरदार है। दमा या साँस लेने में मुश्किल होने की समस्या में भी इस औषधि का प्रयोग किया जा सकता है। तनाव और दिमागी कमजोरी की स्थिति में भी दिव्य धारा के इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
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❖ तुलसी घनवटी
घटक -
1. तुलसी के पत्ते
विधि -
- • तुलसी के पत्ते को अग्नि को औटाकर उसका घन बनाया जाता है। घन से आधे-आधे ग्राम की या देशी चने के आकार की गोलियाँ बनाई जाती हैं।
- • प्रत्येक तुलसी घनवटी की गोली में 500 मिलीग्राम तुलसी का घन शामिल है।
तुलसी घनवटी लाभ एवं उपयोग
- • तुलसी पुराने पेट के संक्रमण के उपचार के लिए एक अद्भुत जड़ी-बूटी है। यह एक ठंडी औषधि है जो पेट के दर्द से भी राहत प्रदान करती है।
- • यह औषधि इम्युनिटी बढ़ाती है और सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा और कफ की बीमारियों की रोकथाम करती है।
- • बच्चों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है इसलिए बच्चे बहुत जल्दी सर्दी, खांसी और निमोनिया जैसी बीमारियों का शिकार बन जाते हैं ऐसे में दिव्य तुलसी घनवटी कुदरती तरीके से इन बीमारियों को ठीक करती है और पुरे उम्र के लिए बच्चों को निरोगी बनाता है।
- • दिव्य तुलसी घनवटी शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है, यह औषधि फेफड़ों में खून की पूर्ति करती है और संक्रमण से बचाती है।
- • दिव्य तुलसी घनवटी खून को साफ करती है और त्वचा को भी निखारती है इसके अलावा यह औषधि बुखार और जलन से भी राहत देती है।
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- • दिव्य तुलसी घनवटी पुरानी से पुरानी खांसी और बुखार की रोकथाम करने में बहुत ही मददगार है और यह बिना किसी दुष्प्रभाव के इन रोगों को दूर करता है।
❖ एडी से चोटी तक शरीर की ब्लॉक नसों को खोले -
घटक: -
| 2. दाल चीनी | - | 1 ग्राम |
|---|---|---|
| 3. काली मिर्च साबुत | - | 10 ग्राम |
| 4. तेज पत्ता | - | 10 ग्राम |
| 5. मगज | - | 10 ग्राम |
| 6. मिश्री | - | 10 ग्राम |
| 7. अखरोट गिरी | - | 10 ग्राम |
| 8. अलसी | - | 10 ग्राम |
विधि -
- • सभी को पीसकर बारीक करके, 6 ग्राम की 10 पुड़िया बना लें।
- • एक पुड़िया हर रोज सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी से लेनी है और एक घंटे तक कुछ भी नहीं खाना है, चाय पी सकते हैं,
- • ऐडी से लेकर चोटी तक की कोई भी नस बंद हो तो खुल जायेगी, दिल के रोगी भी ध्यान दे ये खुराक लेते रहे, पूरी जिंदगी हार्ट अटैक या लकवा नहीं हो सकता।
❖ आयुर्वेदिक देशी दारू
संतरा 100 ग्राम, तुलसी के पत्ते मिलाकर रस निकालें, 200 ग्राम अर्क मिलाओं। कांच की बोतल में भर लों, चीकू डालने से मीठा लगेगा। 15 दिन अच्छा रहेगा।
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❖ आईड्रोप(नेत्रबिंदु)
घटक: -
| 1. मध | - | 100 मिलीलीटर |
|---|---|---|
| 2. गुलाब जल | - | 200 मिलीलीटर |
| 3. बछड़ी का मूत्र 7 परत कपड़े छान कर | - | 20 मिलीलीटर |
विधि-
तीनों को आपस में मिलाये, ड्रोप को बोटल में भर लें।
❖ गेंग्रीन(असाध्य घाव) मरहम
घटक: -
| 1. देशी गेंदा फूल की पंखुडिया | - | 100 ग्राम |
|---|---|---|
| 2. गौमूत्र धन पाउडर | - | 10 ग्राम |
| 3. नीम पत्त पाउडर | - | 10 ग्राम |
| 4. हल्दी | - | 10 ग्राम |
विधि – सभी को बारीक पाउडर करके, गौमूत्र के साथ पेस्ट बनाए, दिन में दो बार घाव पर लगाये। दाद या सोरायसिस कितना भी पुराना चमड़ी रोग हो, वो भी ठीक हो जायेगा।
❖ नहाने का हर्बल साबुन
घटक: -
| 1. मुल्लानी मिट्टी | - | 1 किलोग्राम |
|---|---|---|
| 2. आँवला (सूखा) | - | 100 ग्राम |
| 3. नीम की हरी पत्तियाँ | - | 100 ग्राम |
| 4. दही का मट्टा | - | 250 ग्राम |
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| 5. नींबू का रस | - | 100 ग्राम |
|---|---|---|
| 6. रीठा | - | 50 ग्राम |
| 7. हल्दी | - | 25 ग्राम |
| 8. सुंगध | - | इच्छानुसार |
विधि -
- • मुल्लानी मिट्टी को इमामदस्ते में बारीक कूटकर छान लें।
- • 100 ग्राम नीम की पत्ती को 500 ग्राम पानी में उबालकर छान लें ताकि लगभग 400 ग्राम पानी प्राप्त हो जाये।
- • 100 ग्राम आँवले को तैयार नीम के पानी में 12 घण्टे भिगोकर रख दें। तत्पश्चात् अच्छी तरह मथकर तथा छानकर आँवला पानी तैयार करें।
- • 50 ग्राम रीठा को 100 ग्राम पानी में 12 घण्टे भिगोकर रख दें। तत्पश्चात् अच्छी तरह मथकर तथा छानकर रीठा झाग पानी तैयार करें।
- • आँवले के पानी, रीठा झाग पानी को एक जगह मिला दें। इस घोल में मठ्ठा (अच्छई तरह मथी हुई दही) तथा हल्दी को डालकर अच्छी तरह मिला दें।
- • तैयार घोल को मुल्लानी मिट्टी के साथ गूँथकर रख दें। 4-5 घण्टे बाद मिट्टी में 100 ग्राम नींबू का रस तथा रुचि के अनुसार सुर्गाधि डालकर पुनः अच्छी तरह गूँथाई करें।
- • उपरोक्त तैयार सामग्री साँचे में डालकर अथवा हाथ से साबुन सूरखने में मौसम के अनुसार 3 से 6 दिन तक लग जाता है।
- • अच्छी तरह सूरख जाने पर पैकिंग करें।
❖ वैदिक साबुन
| 1. मुल्लानी | - | 400 ग्राम |
|---|---|---|
| 2. सोना गेरू | - | 250 ग्राम |
| 3. चना बेसन | - | 150 ग्राम |
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- | हल्दी | - | 100 ग्राम ---|---|---|---
- | भीमसेन कपूर | - | 50 ग्राम
- | सफेद चन्दन पाउडर | - | 100 ग्राम
- | हरड छोटी | - | 50 ग्राम
- | फिटकरी | - | 10 ग्राम
- | एलोवेरा गुटा | - | 100 ग्राम
- | शुद्ध तेल | - | 100 ग्राम
- | गुलाब जल | - | 100 ग्राम
- | नीम तेल | - | 50 ग्राम
- | गौमूत्र | - | 50 ग्राम
- | गौदुग्ध | - | 50 ग्राम
- | गौदही | - | 20 ग्राम
- | गौधृत | - | 20 ग्राम
- | नीबू | - | 2 रस
- | रीठा | - | 100 ग्राम
- | शिकाकाई | - | 80 ग्राम
- | नीम पत्ते | - | 80 ग्राम
विधि -
200 मिलीलीटर पानी में गौमूत्र, रीठा, शिकाकाई, नीम उबाले, 150 मिलीलीटर बचे मिश्रण को छान लो, बाद में सभी को मिला ले, अब और पानी डालकर आटा गूथ लें, तेल लगा कर साँचे में डाले, दो दिन छाँव में सुखाये फिर धूप में 5 दिन रखें।
❖ शेविंग क्रीम
नारियल तेल और ऐलोवेरा जेल को आपस में मिलाकर बोतल में भर लें, हाथ में लेकर चेहरे पर लगाये।
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❖ ऐलोवेरा फेसवॉश
500 ग्राम ऐलोवेरा, 5 नींबू और गुलाबजल को मिक्स करो और बोतल में भर दें।
❖ आफ्टर शेव
घटक: -
| 1. | गौमूत्र अर्क | - | 500 मिली. |
|---|---|---|---|
| 2. | पानी | - | 500 मिली |
| 3. | अमृतधारा | - | 10 मिली |
विधि -
सबको आपस में मिलाये और बोतल में बंद कर दें।
❖ हर्बल डेटोल
1 लीटर पानी में 100 ग्राम नीम पत्ते डाले उबाले, 800 मिली बचने पर छान ले, 200 ग्राम गौमूत्र सात परत सूती कपड़े में छान कर डाले, 10 ग्राम फिटकरी डाले और बोतल में भर लें।
❖ कामधेनु धूपबत्ती
घटक: -
| 1. | कामधेनु | - | 1 किलो |
|---|---|---|---|
| 2. | गीला गोबर | - | 500 ग्राम |
| 3. | खस लुगदा | - | 200 ग्राम |
| 4. | गाय का घी | - | 200 ग्राम |
| 5. | चावल आटा | - | 200 ग्राम |
| 6. | राल | - | 250 ग्राम |
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7. गौमूत्र - आवश्यकतानुसार विधि-
सभी को आपस में मिलाकर, इन्जेक्शन सीरीज में जमा दे, 2 दिन सुखाये।
❖ धूपबत्ती (चंदन)
घटक: -
| 1. | गोबर | - | 1 किलो |
|---|---|---|---|
| 2. | नागर मोथा | - | 50 ग्राम |
| 3. | लाल चंदन | - | 50 ग्राम |
| 4. | जुरादा देवदार | - | 50 ग्राम |
| 5. | चावल आटा | - | 50 ग्राम |
| 6. | कपूर | - | 50 ग्राम |
| 7. | राल | - | 50 ग्राम |
| 8. | गौमूत्र | - | आवश्यकतानुसार |
विधि -
सबको आपस में मिला कर धूपस्टीक बना लें।
❖ मसाला धूपबत्ती
घटक: -
| 1. | कपूर कायली बड़ी | - | 200 ग्राम |
|---|---|---|---|
| 2. | कपूर कायली छोटी | - | 100 ग्राम |
| 3. | हाउबेर | - | 100 ग्राम |
| 4. | सफेद चंदन | - | 10 ग्राम |
| 5. | गुलाब पुष्प | - | 10 ग्राम |
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- | गोबर | - | 50 ग्राम ---|---|---|---
- | गाय का घी | - | 150 ग्राम
विधि -
सब मिला कर, धूप में सुखा दे, फिर साँचे में जमा दें।
❖ धूपदिया
घटक: -
- | हवन सामग्री | - | 500 ग्राम ---|---|---|---
- | गोबर पाउडर | - | 500 ग्राम
- | मैदा पाउडर | - | 100 ग्राम
- | लकड़ी पाउडर | - | 500 ग्राम
- | राई | - | 100 ग्राम
- | गवारगम | - | 10 ग्राम
- | पानी | - | आवश्यकतानुसार
विधि -
- • अच्छे से मिलाये, पानी में डालकर रोटी जैसा गूथ लें, गौ पूजन साँचे में जमा दे।
- • 1 घंटें बाद साँचे में डालकर निकाल लें।
❖ हवन कंठे-अग्निहोत्र
घटक: -
- | गोबर ताजा | - | 5 किलो ---|---|---|---
विधि -
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- • बेलेन साईज से 10mm का लेपर बनाओ
- • गौपूजन साँचे से 3 इंच के कन्डे बनाये।
❖ मच्छर धूपबत्ती
घटक: -
- | ताजा गोबर | - | 1 किलो ---|---|---|---
- | कपूर | - | 100 ग्राम
- | नीगडी के पत्ते(नगाडे) | - | 100 ग्राम
- | नीम के पत्ते | - | 100 ग्राम
विधि -
- • पत्ते का चूर्ण कपड़े में छान ले, सबको अच्छे से मिलाये, 1/2 इंच मेटल की नली में 3 इंच लम्बी स्टी बना लें।
- • सुखा कर पैकेट में भर लें।
❖ मच्छर कोइल
घटक: -
- | गोमय पाउडर | - | 500 ग्राम ---|---|---|---
- | चारकोल पाउडर | - | 200 ग्राम
- | गवार गम | - | 15 ग्राम
- | नीम पत्ते पाउडर | - | 100 ग्राम
- | मैदा लकड़ी | - | 100 ग्राम
- | पाइन ऑयल | - | 10 मिली
- | नीम ऑयल | - | 10 मिली
- | सीट्रोनेला ऑयल | - | 25 मिली
- | गौमूत्र | - | 500 मिली
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विधि -
- • गौ पूजन सांचे में कोईल बना लें।
❖ ऐंटी रेडियेशन चिप
घटक: -
- 1. गोमय पाउडर
- 2. गवार गम
- 3. डबल गम स्टीकर
- 4. पानी
विधि -
- • गोमय पाउडर और गवार गम को मिलाकर बेलन से पतली 2 मिमी पतली रोटी बनाये
- • 20-20 मिमी के वर्ग छुरी से काटो
- • सुखाने के बाद डबल गम स्टीकर लगाये
लाभ - मोबाइल फोन पर चिपकाने से इलेक्ट्रॉन मेग्नेटीक रेडियेशन से बचाव होता है।
❖ झूमर
घटक: -
| 1. | गोमय पाउडर | - | 1 किलो |
|---|---|---|---|
| 2. | गवार गम | - | 20 ग्राम |
| 3. | वोटर कम्प्लर बॉक्स | - | 12 कलरवाला |
विधि -
- • पाउडर और गम मिलाये, रोटी जैसा आटा गूंधे।
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