स्वदेशी उत्पाद बनाने की विधि (भाग 2)

स्वदेशी उत्पाद बनाने की विधि (भाग 2)
Swadeshi Utpad Banane Ki Vidhi (Bhag 2)
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 2 · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
DevanagariHindipublished33 पृष्ठ
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दिव्य धारा के लाभ एवं प्रयोग
दिव्य धारा में सभी घटकों का सिर दर्द, खोंसी या जुकाम पर प्रभाव पड़ता है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ लिखे हैं।
- • दिव्य धारा शरीर के विभिन्न दर्द जैसे सिर का दर्द, दांत का दर्द, पेट का दर्द को दूर करने में सहायक है, इसके अलावा यह नाक से खून निकलने की समस्या और त्वचा की किसी भी तरह की समस्या जैसे की संक्रमण से यह राहत देती है। यह औषधि माइग्रेन के लिए भी लाभदायक है।
- • दिव्य धारा का मुख्य घटक पुदीना है इसीलिए यह पेट से सम्बंधित सभी रोगों को रोकथाम के लिए बहुत असरदार है। इसके प्रयोग से पेट दर्द , कब्ज ,पेट का भारीपन, अम्लता, गैस में राहत मिलती है और पाचन क्रिया सही रहती है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है और अपच नहीं होने देती। दिव्य धारा का प्रयोग बाहरी तरीके से ही किया जाता है।
- • दिव्य धारा सर्दी जुकाम और खोंसी में भी राहत देती है। जुकाम में होने वाली समस्याओं जैसे सिर दर्द, गले की खराश और दर्द, बहती हुई नाक, संक्रमण, आँखों में जलन आदि को दूर करने में भी सहायक है। मांसपेशियों के दर्द में भी दिव्य धारा के प्रयोग से लाभ मिलता है और मांसपेशियों की अकड़न में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
- • दिव्य धारा हैजा और पुराने अस्थमा जैसे रोगों की रोकथाम के लिए असरदार है। दमा या साँस लेने में मुश्किल होने की समस्या में भी इस औषधि का प्रयोग किया जा सकता है। तनाव और दिमागी कमजोरी की स्थिति में भी दिव्य धारा के इस्तेमाल से अच्छे परिणाम मिलते हैं।
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