तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)
Taittiriya Aranyaka Hindi
महर्षि वैशम्पायन द्वारा
स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 618, कुल 940 में से
संदर्भ में पढ़ें५ प्रपाठके ४ अनुवाकः। ६०५
तेज॑सै॒वैन॑मनक्ति^(१४)। ^{(१५)}पृ॒थि॒वीं तर्प॑सस्त्राय॒स्वेति॑ हि॒र॑ण्यमु॒पास्य॑ति। अ॒स्या अ॑नतिदा॒हाय॑^(१५)। ^{(१६)}शि॒रो वा ए॒तद्य॒ज्ञस्य॑। यत्प्र॑व॒र्ग्यः॑। अ॒ग्निः सर्वा॒ देव॑ताः। प्ल॒क्षाना॒दीप्त्योपास्य॑ति। दे॒वता॑स्वे॒व य॒ज्ञस्य॒ शिरः॒ प्रति॑दधाति^(१६)। ^{(१७)}अप्र॑तीशीर्णाग्रं भवति। ए॒तद्वै ब॒र्हिर्ह्यैषः^(१७)॥ ५॥
^{(१८)}अ॒र्चिर॑सि शो॒चिर॑सीत्या॑ह। तेज॑ ए॒वास्मि॑न्ब्रह्मवर्च॒सं द॑धाति^(१८)। ^{(१९)}सꣳसी॑दस्व म॒हाँꣳ अ॑सी॒त्याह॑। म॒हान् ह्येषः^(१९)। ^{(२०)}ब्रह्म॑वादि॒नो व॑दन्ति। ए॒ते वाव त ऋ॒त्विजः॑। ये द॑र्शपूर्णमा॒सयोः॑। अथ॒ क्क॑था होता॒ यज॑मानाया॒शिषो॒ नाशा॑स्त॒ इति॑। पु॒र॒स्ता॑दा॒शीः खलु॒ वा अ॒न्यो य॒ज्ञः। उ॒प॒रि॒ष्टा॑दाशी॒रन्यः॑^(२०)॥ ६॥
^{(२१)}अना॑धृष्या पु॒रस्ता॒दिति॒ यदे॒तानि॒ यजूं॒ष्याह॑।
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