तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)
Taittiriya Aranyaka Hindi
महर्षि वैशम्पायन द्वारा
स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 637, कुल 940 में से
संदर्भ में पढ़ें६२४ तैत्तिरीये आरण्यके
अथ अष्टमोऽनुवाकः ।
(१)विश्वा॑ आशा दक्षि॒णस॒दित्या॑ह । विश्वा॑नेव दे॒वान् प्री॑णाति । अथो॑ दुरि॒ष्ट्या ए॒वैनं॑ पाति^(१) । (२)विश्वांᳵ दे॒वान॑याडि॒हेत्या॑ह । विश्वा॑नेव दे॒वान् भाग॒धेये॑न समर्धयति^(२) । (३)स्वाहा॑कृतस्य घ॒र्म्मस्य॒ मधोः॒ पिवतमश्विनेत्या॑ह । अ॒श्विना॑वेव भाग॒धेये॑न॒ समर्ध॑यति^(३) । (४)स्वाहा॒ऽग्नये॑ य॒ज्ञिया॑य॒ शं यजु॑र्भिरित्या॑ह । अ॒ग्नयै॒वैनं॑ घारयति । अथो॑ ह॒विरे॒वाकः॑^(४) ॥ १ ॥
(५)अ॒श्विना॑ घ॒र्म्मं पा॑तः॒ हार्द्दि॑वानम॒हर्द्दि॑वाभि॒रू॒तिभि॑रित्या॑ह । अ॒श्विना॑वेव भाग॒धेये॑न॒ समर्ध॑यति^(५) । (६)अनु॑ वां द्यावापृथिवी मं॑सातामित्याहानु॑मत्यै^(६) । (७)स्वाहेन्द्रा॑य स्वाहेन्द्राव॒डित्या॑ह । इन्द्रा॑य॒ हि पु॒रोहू॒यतै॑^(७) । (८)आश्राव्या॑ह घ॒र्म्मस्य॑ य॒जेति॑ । वषट्कृ॑ते
| संख्या | सन्दर्भ | पृष्ठ संख्या | विवरण |
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| १ | एतन्मन्त्रस्य भाष्यं | ४७८ | पृष्ठे द्रष्टव्यं । |
| २ | ” | ४७६ | ” |
| ३ | ” | ४७६ | ” |
| ४ | ” | ४७६ | ” |
| ५ | ” | ४८० | ” |
| ६ | ” | ४८१ | ” |
| ७ | ” | ४८१ | ” |
| ८ | ” | ४८२ | ” |