भारतकोश
तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary

महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा

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आ. १० ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ १०५ मुनितत्त्वार्णं द्विकपदमन्त्रं वस्वक्षिभुवनमपरकला । अग्न्यर्णतत्त्वमेककपदमन्त्रं सैन्यभुवनमिति तुर्या ॥२॥ षोडश वर्णाः पदमन्त्रतत्त्वमेकं च शान्त्यतीतेयम् । अभिनवगुप्तेनार्यत्रियमुक्तं संग्रहाय शिष्येभ्यः ॥३॥ भुवनजालसअलउ परिसरसहअवसीसइतत्ताहंसकूउ । तत्तभाउकलणा इविमरिसहसीसइपञ्चकलाहंसरूउ ॥ पञ्चकलामउएहु महेसरकुण्डइविउज्जइ । - इच्छइसुहमउ भरिहिविबोधतरङ्गमहासह ॥ सोच्चिअभासइ भवतहविसरउ । सअलउअद्धजालु निअधअणिपरिमरिमेहहरो ॥ चेअणुभरिअभरिउ अप्पहमणिसच्चिअपाणिमणु । माणसपाणधण धीसामसुपूरितजज्जिबणु ॥ तंजिघडाइ निलहु परभइरवगाहहुहोइतणु । मत्तिदाणुआवाहणु प्रअणुसणिणहाणुइउ अहिणउउडु ॥ सब्बिबहअद्धकलण निव्वॉहाराएतिलडेचिअएहइतत्त्व । इति श्रीमदभिनवगुप्ताचार्यविरचिते तन्त्रसारे कलाद्यध्वप्रकाशनं नाम दशममाह्निकम् ॥१०॥