तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ आ. ३ हो जाते हैं, जब प्रकाशमात्रता प्रधान है तब रश्रुति, विश्रान्ति आने में ल श्रुति होती है। र और ल ये दोनों के प्रकाश और स्तम्भ ( स्थैर्य ) स्वभाव है। इष्यमाण होने पर भी बाहर की वस्तु के समान स्फुट नहीं क्योंकि स्फुट होने पर वस्तु की उत्पत्ति हो जाती, उसी प्रकार इच्छा और ईशान भी ( स्फुट नहीं ) अतः अस्फुट होने के कारण र और ल श्रुतिमात्र हैं, ये व्यञ्जन वर्ण की तरह नहीं हैं। ये चार वर्ण उभयों ( पुरुष और स्त्री ) का आभास धारण करते हैं नपुंसक कहते हैं। ये चार ऋ-ॠ-ऌ-ॡ हैं। अनुत्तर और आनन्द जब इच्छा की ओर प्रसृत होते हैं तब ए, ओ ये दो वर्णों का, फिर इन दोनों में अनुत्तर आनन्द के संघट्ट होने पर ऐ और औ का उदय होता है। यही क्रियाशक्ति ए, ऐ, ओ, औ चार वर्णों का रूप है। इसके अनन्तर क्रियाशक्ति के अवसान होने पर समग्र कार्यभूत ( वर्ण ) पुनः अनुत्तर में प्रवेश करेंगे। तब सम्बेदनसार अर्थात् प्रकाश स्वभाव बिन्दु के रूप में वे स्थित हो जाते हैं—जिसे वर्ण माला के 'अं' कहते । इसके बाद उसी में ( बिन्दु में ) अनुत्तर का विसर्ग होता है—वही अः है।१ ये सोलह सब परामर्शों का बीजस्वरूप हैं ऐसा कहा जाता है। उससे उत्पन्न योनिरूप व्यञ्जन हैं। उनमें ( व्यंजनों में ) अनुत्तर से क वर्ग, अकर्मक इच्छा से च वर्ग, सकर्मक इच्छा से ट तथा त वर्ग, उन्मेष से प वर्ग का उदय होता हैं। पाँच शक्ति के योग से सभी वर्ग पाँच होते हैं। तीन प्रकार इच्छा से य, र, ल, उन्मेष से व, तीन प्रकार इच्छा से श, ष, स, विसर्ग से ह् कार, योनि के संयोग से क्ष कार का उदय होता है। इस प्रकार यह अनुत्तर भगवान् ही कुलेश्वररूपी हैं उन्हीं की एकमात्र कौलिकी विसर्ग शक्ति जो आनन्दरूप को प्राप्तकर उसी से प्रारम्भ होकर बाहरी सृष्टि तक स्पन्दित होती है और वर्ग आदि परामर्शात्मक बनकर र और ल का आभास भी प्राप्त करते हैं, इसलिए इन्हें नपुंसक वर्ण कहते हैं। १. वर्णमाला के क्रियाशक्ति के प्रतीक चार वर्ण हैं जो ए, ऐ, ओ और औ हैं। स्पन्द के बहिर्मुख गति औ तक आने के बाद समाप्त हो जाती है। बहिर्मुख धारा की पूर्णता ही गति की समाप्ति है, इसके बाद बहिर्मुख गति के स्पन्दन से शक्ति की सब कलाएँ एक बनकर बिन्दुभाव प्राप्त करती हैं।