भारतकोश
तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)

तर्कसंग्रह एवं न्यायबोधिनी (अन्नम्भट्ट - पं. केदारनाथ त्रिपाठी सान्वय सटीक)

Tarkasangraha with Nyayabodhini of Annambhatta by Kedarnath Tripathi

अन्नम्भट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

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२८ तर्कसंग्रहः [ प्रत्यक्षपरिच्छेदः कार्येण कारणेन वा सहैकस्मिन्नर्थे समवेतं सत् कारणमसम- वायिकारणम् । यथा तन्तुसंयोगः पटस्य । तन्तुरूपं पटरूपस्य । कार्य के साथ या कारण के साथ एक पदार्थ में समवायसम्बन्ध से रहता हुआ जो कारण, वह असमवायिकारण है। जैसे = न्तुओं का संयोग पट का असमवायि- कारण होता है और तन्तु का रूप पट के रूप के प्रति असमवायिकारण होता है। न्यायबोधिनी समवायसम्बन्धेन घटाधिकरणे कपालादौ कपालादेः तादात्म्यसम्बन्धे- नैव सत्त्वात्, समवायसम्बन्धावच्छिन्नघटत्वावच्छिन्नकार्यतानिरूपिततादा- त्म्यसम्बन्धावच्छिन्नकारणतायाः कपालादौ सत्त्वाल्लक्षणसमन्वयः । समवायेन जन्यभावत्वावच्छिन्नं प्रति तादात्म्यसम्बन्धेन द्रव्यस्यैव कारणत्वात् जन्यभावेषु द्रव्यगुणकर्मसु त्रिषु द्रव्यमेव समवायिकारणम् । द्रव्ये तु द्रव्यावयवाः समवायिकारणम् । गुणादावपि द्रव्यमेव समवायि- कारणमित्याशयेनाह—पटश्च स्वगतरूपादेरिति । समवायिकारणमित्यनु- षज्यते । असमवायिकारणं लक्षयति—कार्येणेति । कार्येण सहैकस्मिन्नर्थे समवेतं सत् यत् कारणं तदसमवायिकारणमित्यन्वयः । कारणेन सहैकस्मिन्नर्थे समवेतं सत् यत् कारणं तदसमवायिकारणमित्यन्वयः । अत्र 'कारणेन' इत्यस्य स्वकार्यसमवायिकारणेनेत्यर्थः । जन्यद्रव्यमात्रेऽवयवसंयोगस्यैवास- हिन्दी-कला और कर्म के प्रति द्रव्य ही समवायिकारण होता है। द्रव्यसमवायिकारणता का उदाहरण कपाल को पहले बताया जा चुका है। वहां घटात्मक द्रव्य के प्रति समवायि- कारण उसका अवयवभूत कपाल भी द्रव्य ही है। इस प्रकार द्रव्य का समवायिकारण द्रव्य हुआ, यह स्पष्ट हो गया । उक्त नियम के अनुसार गुणस्वरूप जन्यभाव के प्रति भी द्रव्य समवायिकारण होता है। इसका उदाहरण मूल में बताया गया है—कि पट अपने रूप के प्रति सम- वायिकारण है। यहाँ पट का रूप गुण है। इसी प्रकार कर्म का समवायिकारण भी द्रव्य होता है, इसका उदाहरण है—अश्व आदि। घोड़ा अपनी गमन क्रिया (कर्म) के प्रति समवायिकारण होता है। क्योंकि समवायसम्बन्ध से गमनक्रिया अश्व में ही उत्पन्न होती है। असमवायिकारण का लक्षण बताते हैं—कार्य के साथ एक अर्थ में समवेत होता हुआ ( समवायसम्बन्ध से रहता हुआ ) जो कारण होता है, वह असमवायिकारण है। अथवा कारण के साथ एक अर्थ में समवेत होता हुआ जो कारण होता है वह भी असमवायिकारण है। यहाँ कारण के साथ का अर्थ है - अपने कार्य का जो समवायि-