भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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पृष्ठ 106

अध्याय - ७ अथ सप्तमोऽध्यायः The Five Vows हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिर्व्रतम् ॥१॥ [ हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिः ] हिंसा, झूठ, चोरी, मैथुन और परिग्रह अर्थात् पदार्थों के प्रति ममत्वरूप परिणमन

  • इन पाँच पापों से (बुद्धिपूर्वक) निवृत्त होना सो [ व्रतम् ] व्रत है। Desisting from injury, falsehood, stealing, unchastity, and attachment, is the (fivefold) vow. देशसर्वतोऽणुमहती ॥२॥ व्रत के दो भेद हैं - [ देशतः अणुः ] उपरोक्त हिंसादि पापों का एकदेश त्याग करना सो अणुव्रत और [ सर्वतः महती ] सर्वदेश त्याग करना सो महाव्रत है। (The vow is of two kinds), small and great, from its being partial and complete. तत्स्थैर्यार्थं भावनाः पञ्च पञ्च ॥३॥ [ तत्स्थैर्यार्थं ] उन व्रतों की स्थिरता के लिये [ भावनाः पञ्च पञ्च ] प्रत्येक व्रत की पाँच-पाँच भावनायें हैं। किसी वस्तु का बार बार विचार करना सो भावना है। 93