तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ८ कषायवेदनीय - ये चार भेदरूप मोहनीय कर्म के हैं और इसके अनुक्रम से [ त्रिद्विनवषोडशभेदाः ] तीन, दो, नव और सोलह भेद हैं। वे इस प्रकार से हैं - [ सम्यक्त्वमिथ्यात्वतदुभयानि ] सम्यक्त्व मोहनीय, मिथ्यात्व मोहनीय और सम्यग्मिथ्यात्वमोहनीय - ये दर्शन मोहनीय के तीन भेद हैं; [ अकषायकषायौ ] अकषायवेदनीय और कषायवेदनीय ये दो भेद चारित्र मोहनीय के हैं; [ हास्यरत्यरतिशोकभयजुगुप्सास्त्रीपुन्नपुंसकवेदाः ] हास्य, रति, अरति, शोक, भय, जुगुप्सा, स्त्रीवेद, पुरुषवेद और नपुंसकवेद - ये अकषायवेदनीय के नव हैं; और [ अनन्तानुबन्ध्यप्रत्याख्यानप्रत्याख्यानसंज्वलनविकल्पाः च ] अनन्तानुबन्धी, अप्रत्याख्यान, प्रत्याख्यान तथा संज्वलन के भेद से तथा [ एकशः क्रोधमानमायालोभाः ] इन प्रत्येक के क्रोध, मान, माया और लोभ ये चार प्रकार - ये सोलह भेद कषायवेदनीय के हैं। इस तरह मोहनीय कर्म के कुल अट्ठाईस भेद हैं। The deluding karmas are of twenty-eight kinds. These are the three subtypes of faith-deluding karmas¹, the two types of conduct-deluding karmas ¹ The three subtypes of faith-deluding karmas are wrong belief, mixed right and wrong belief, and right belief slightly clouded by wrong belief. 117