तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ८ [ आदितस्तिसृणाम् ] आदि से तीन अर्थात् ज्ञानावरण, दर्शनावरण, तथा वेदनीय [ अन्तरायस्य च ] और अन्तराय - इन चार कर्मों की [ परा स्थितिः ] उत्कृष्ट स्थिति [ त्रिंशत्सागरोपमकोटीकोट्यः ] तीस कोड़ाकोड़ी सागर की है। The maximum duration of the three main types (primary species) from the first and obstructive karmas is thirty sāgaropama kotīkotī. सप्ततिर्मोहनीयस्य ॥१५॥ [ मोहनीयस्य ] मोहनीय कर्म की उत्कृष्ट स्थिति [ सप्ततिः ] सत्तर कोड़ाकोड़ी सागर की है। Seventy sāgaropama kotīkotī is the maximum duration of the deluding karmas. विंशतिर्नामगोत्रयोः ॥१६॥ [ नामगोत्रयोः ] नाम और गोत्र कर्म की उत्कृष्ट स्थिति [ विंशतिः ] बीस कोड़ाकोड़ी सागर की है। Twenty sāgaropama kotīkotī is the maximum duration of the name-karma and the status- determining karma. 121