तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
पृष्ठ 135, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 135
अध्याय - ८ त्रयस्त्रिंशत्सागरोपमाण्यायुषः ॥१७॥ [ आयुषः ] आयु कर्म का उत्कृष्ट स्थिति [ त्रयस्त्रिंशत्सागरोपमाणि ] तेंतीस सागर की है। Thirty-three sāgaropamas is the maximum duration of life. अपरा द्वादशमुहूर्ता वेदनीयस्य ॥१८॥ [ वेदनीयस्य अपरा ] वेदनीय कर्म की जघन्य स्थिति [ द्वादशमुहूर्ता ] बारह मुहूर्त की है। The minimum duration of the feeling-producing karma is twelve muhūrtas. नामगोत्रयोरष्टौ ॥१९॥ [ नामगोत्रयोः ] नाम और गोत्र कर्म की जघन्य स्थिति [ अष्टौ ] आठ मुहूर्त की है। The minimum duration of the name-karma and the status-determining karma is eight muhūrtas. शेषाणामन्तर्मुहूर्ता ॥२०॥ 122