तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
पृष्ठ 136, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 136
अध्याय - ८ [ शेषाणां ] बाकी के अर्थात् ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय, अन्तराय और आयु - इन पाँच कर्मों की जघन्य स्थिति [ अन्तर्मुहूर्ता ] अन्तर्मुहूर्त की है। The minimum duration of the rest is up to one muhūrta. विपाकोऽनुभवः ॥२१॥ [ विपाकः ] विविध प्रकार का जो पाक है [ अनुभवः ] सो अनुभव है। Fruition is the ripening or maturing of karmas. स यथानाम ॥२२॥ [ सः ] यह अनुभाग बन्ध [ यथानाम ] कर्मों के नाम के अनुसार ही होता है। (The nature of) fruition is according to the names of the karmas. ततश्च निर्जरा ॥२३॥ 123