भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ९ [ उत्तमक्षमामार्दवार्जवशौचसत्यसंयमतपस्त्यागाकिञ्चन्य- ब्रह्मचर्याणि ] उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य - ये दस [ धर्मः ] धर्म हैं। Supreme forbearance, modesty, straightforward- ness, purity, truthfulness, self-restraint, austerity, renunciation, non-attachment, and celibacy constitute virtue or duty. अनित्याशरणसंसारैकत्वान्यत्वाशुच्यास्रवसंवरनिर्जरा- लोकबोधिदुर्लभधर्मस्वाख्याततत्त्वानुचिन्तनमनुप्रेक्षाः ॥७॥ [ अनित्याशरणसंसारैकत्वान्यत्वाशुच्यास्रवसंवरनिर्जरा- लोकबोधिदुर्लभधर्मस्वाख्याततत्त्वानुचिन्तनम् ] अनित्य, अशरण, संसार, एकत्व, अन्यत्व, अशुचि, आस्रव, संवर, निर्जरा, लोक, बोधिदुर्लभ और धर्म - इन बारह के स्वरूप का बारम्बार चिन्तवन करना सो [ अनुप्रेक्षाः ] अनुप्रेक्षा है। Reflection is meditating on transitoriness, helpless- ness, transmigration, loneliness, distinctness, impurity, influx, stoppage, dissociation, the universe, rarity of enlightenment, and the truth proclaimed by religion. 128

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