तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 150, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ९ बाह्याभ्यन्तरोपध्योः ॥२६॥ [ बाह्याभ्यन्तरोपध्योः ] बाह्य उपधिव्युत्सर्ग और अभ्यंतर उपधिव्युत्सर्ग - ये दो व्युत्सर्ग तप के भेद हैं। Giving up external and internal attachments. उत्तमसंहननस्यैकाग्रचिन्तानिरोधो ध्यानमान्तर्मुहूर्तात् ॥२७॥ [ उत्तमसंहननस्य ] उत्तम संहनन वाले के [ आ अन्तर्मुहूर्तात् ] अन्तर्मुहूर्त तक [ एकाग्रचिन्तानिरोधो ध्यानम् ] एकाग्रतापूर्वक चिन्ता का निरोध सो ध्यान है। Concentration of thought on one particular object is meditation. In the case of a person with the best physical structure or constitution it extends up to one muhūrta. आर्तरौद्रधर्म्यशुक्लानि ॥२८॥ [ आतरौद्रधर्म्यशुक्लानि ] आर्त, रौद्र, धर्म और शुक्ल - ये ध्यान के चार भेद हैं। 137