भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ९ The painful (sorrowful), the cruel, the virtuous (righteous), and the pure. परे मोक्षहेतू ॥२९॥ [ परे ] जो चार प्रकार के ध्यान कहे उनमें से अन्त के दो अर्थात् धर्मध्यान और शुक्लध्यान [ मोक्षहेतू ] मोक्ष के कारण हैं। The last two are the causes of liberation. आर्तममनोज्ञस्य सम्प्रयोगे तद्विप्रयोगाय स्मृतिसमन्वाहारः ॥३०॥ [ अमनोज्ञस्य सम्प्रयोगे ] अनिष्ट पदार्थ का संयोग होने पर [ तद्विप्रयोगाय ] उसके दूर करने के लिये [ स्मृतिसमन्वाहारः ] बारम्बार विचार करना सो [ आर्तम् ] ‘अनिष्ट संयोगज’ नाम का आर्तध्यान है। On the contact of disagreeable objects, thinking again and again for their removal is the first kind of sorrowful concentration. 138

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