तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ९ विपरीतं मनोज्ञस्य ॥३१॥ [ मनोज्ञस्य ] मनोज्ञ पदार्थ सम्बन्धी [ विपरीतं ] उपरोक्त सूत्र में कहे हुए से विपरीत अर्थात् इष्ट-पदार्थ का वियोग होने पर उसके संयोग के लिये बारम्बार विचार करना सो 'इष्ट-वियोगज' नाम का आर्तध्यान है। The contrary in the case of agreeable objects. वेदनायाश्च ॥३२॥ [ वेदनायाः च ] रोगजनित पीड़ा होने पर उसे दूर करने के लिये बारम्बार चिन्तवन करना सो वेदनाजन्य आर्तध्यान है। In the case of suffering from pain also. निदानं च ॥३३॥ [ निदानं च ] भविष्यकाल सम्बन्धी विषयों की प्राप्ति में चित्त को तल्लीन कर देना सो निदानज आर्तध्यान है। The wish for enjoyment also. 139