भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ९ पुलाकबकुशकुशीलनिर्ग्रन्थस्नातका निर्ग्रन्थाः ॥४६॥ [ पुलाकबकुशकुशीलनिर्ग्रन्थस्नातका ] पुलाक, बकुश, कुशील, निर्ग्रन्थ और स्नातक - ये पाँच प्रकार के [ निर्ग्रन्थाः ] निर्ग्रन्थ हैं। Pulāka, Bakuṣa, Kuśīla, Nirgrantha, and Snātaka are the passionless saints. संयमश्रुतप्रतिसेवनातीर्थलिंगलेश्योपपादस्थानविकल्पतः साध्याः ॥४७॥ उपरोक्त मुनि [ संयमश्रुतप्रतिसेवनातीर्थलिंगलेश्योपपाद- स्थानविकल्पतः ] संयम, श्रुत, प्रतिसेवना, तीर्थ, लिंग, लेश्या, उपपाद और स्थान - इन आठ अनुयोगों द्वारा [ साध्याः ] भेदरूप से साध्य हैं, अर्थात् इन आठ प्रकार से इन पुलाकादि मुनियों में विशेष भेद होते हैं। They are fit to be described (differentiated) on the basis of differences in self-restraint, scriptural knowledge, transgression, the period of Tīrthamkara, the sign, the colouration, birth, and the state or condition. ॥ इति तत्त्वार्थाधिगमे मोक्षशास्त्रे नवमोध्यायः ॥ ✱ ✱ ✱ 145