भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - १० अथ दशमोऽध्यायः Liberation मोहक्षयाज्ज्ञानदर्शनावरणान्तरायक्षयाच्च केवलम् ॥१॥ [ मोहक्षयात् ] मोह का क्षय होने से (अन्तर्मुहूर्त पर्यन्त क्षीणकषाय नामक गुणस्थान प्राप्त करने के बाद) [ ज्ञानदर्शनावरणान्तरायक्षयात् च ] और ज्ञानावरण, दर्शनावरण तथा अन्तराय इन तीन कर्मों का एक साथ क्षय होने से [ केवलम् ] केवलज्ञान उत्पन्न होता है। Omniscience (perfect knowledge) is attained on the destruction of deluding karmas, and on the destruction of knowledge- and perception-covering karmas and obstructive karmas. बन्धहेत्वभावनिर्जराभ्यां कृत्स्नकर्मविप्रमोक्षो मोक्षः ॥२॥ [ बन्धहेत्वभावनिर्जराभ्यां ] बन्ध के कारणों (मिथ्यात्व, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग) का अभाव तथा निर्जरा के द्वारा [ कृत्स्नकर्मविप्रमोक्षो मोक्षः ] समस्त कर्मों का अत्यन्त नाश हो जाना सो मोक्ष है। Owing to the absence of the cause of bondage and with the functioning of the dissociation of karmas, 146