भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - २ The five-sensed beings with minds are called samjñī jīvas. विग्रहगतौ कर्मयोगः ॥२५॥ [ विग्रहगतौः ] विग्रहगति में अर्थात् नये शरीर के लिये गमन में [ कर्मयोगः ] कार्मण काययोग होता है। In transit from one body to another, (there is) vibration of the karmic body only. अनुश्रेणि गतिः ॥२६॥ [ गतिः ] जीव पुद्गलों का गमन [ अनुश्रेणि ] श्रेणी के अनुसार ही होता है। Transit (takes place) in rows (straight lines) in space. अविग्रहा जीवस्य ॥२७॥ [ जीवस्य ] मुक्त जीव की गति [ अविग्रहा ] वक्रता रहित सीधी होती है। 25