भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - २ The movement of a (liberated) soul is without a bend. विग्रहवती च संसारिणः प्राक्चतुर्भ्यः ॥२८॥ [ संसारिणः ] संसारी जीव की गति [ चतुर्भ्यः प्राक् ] चार समय से पहिले [ विग्रहवती च ] वक्रता-मोड़ सहित तथा रहित होती है। The movement of the transmigrating souls is with bend also prior to the fourth instant. एकसमयाऽविग्रहा ॥२९॥ [ अविग्रहा ] मोड़ रहित गति [ एकसमया ] एक समय मात्र ही होती है अर्थात् उसमें एक समय ही लगता है। Movement without a bend (takes) one instant. एकं द्वौ त्रीन्वाऽनाहारकः ॥३०॥ विग्रहगति में [ एकं द्वौ वा त्रीन् ] एक दो अथवा तीन समय तक [ अनाहारकः ] जीव अनाहारक रहता है। 26