तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - २ For one, two, or three instants (the soul remains) non-assimilative. सम्मूर्च्छनगर्भोपपादा जन्म ॥३१॥ [ सम्मूर्च्छनगर्भउपपादाः ] सम्मूर्च्छन, गर्भ और उपपाद तीन प्रकार का [ जन्म ] जन्म होता है। Birth is by spontaneous generation, from the uterus or in the special bed. सचित्तशीतसंवृताः सेतरा मिश्राश्चैकशस्तद्योनयः ॥३२॥ [ सचित्त शीत संवृताः ] सचित्त, शीत, संवृत [ सेतरा ] उससे उलटी तीन – अचित्त, उष्ण, विवृत [ च एकशः मिश्राः ] और क्रम से एक एक की मिली हुई तीन अर्थात् सचित्ताचित्त, शीतोष्ण और संवृतविवृत [ तत् योनयः ] ये नव जन्मयोनियाँ हैं। Living matter, cold, covered, their opposites, and their combinations are the nuclei severally. 27