तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - २ (The last two are) without impediment. अनादिसम्बन्धे च ॥४१॥ [ च ] और यह दोनों शरीर [ अनादिसम्बन्धे ] आत्मा के साथ अनादिकाल से सम्बन्ध वाले हैं। (These are of) beginning-less association also. सर्वस्य ॥४२॥ ये तैजस और कार्मण शरीर [ सर्वस्य ] सब संसारी जीवों के होते हैं। (These two are associated) with all. तदादीनि भाज्यानि युगपदेकस्मिन्नाचतुर्भ्यः ॥४३॥ [ तदादीनि ] उन तैजस और कार्मण शरीरों से प्रारम्भ करके [ युगपत् ] एक साथ [ एकस्मिन् ] एक जीव के [ आचतुर्भ्यः ] चार शरीर तक [ भाज्यानि ] विभक्त करना चाहिये अर्थात् जानना चाहिये। 31