भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - २ Commencing with these, up to four bodies can be had simultaneously by a single soul. निरुपभोगमन्त्यम् ॥४४॥ [ अन्त्यम् ] अन्त का कार्मण शरीर [ निरुपभोगम् ] उपभोग रहित होता है। The last is not the means of enjoyment. गर्भसम्मूर्च्छनजमाद्यम् ॥४५॥ [ गर्भ ] गर्भ [ सम्मूर्च्छनजम् ] और सम्मूर्च्छन जन्म से उत्पन्न होने वाला शरीर [ आद्यं ] पहिला - औदारिक शरीर कहलाता है। The first is of uterine birth and spontaneous generation. औपपादिकं वैक्रियिकम् ॥४६॥ [ औपपादिकं ] उपपादजन्म वाले अर्थात् देव और नारकियों के शरीर [ वैक्रियिकम् ] वैक्रियिक होते हैं। The transformable body originates by birth in special beds. 32