तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - ३ अथ तृतीयोऽध्यायः The Lower World and the Middle World रत्नशर्करावालुकापंकधूमतममोमहातमःप्रभाभूमयो घनाम्बुवाताकाशप्रतिष्ठाः सप्ताधोऽधः ॥१॥ अधोलोक में रत्नप्रभा, शर्कराप्रभा, वालुकाप्रभा, पंकप्रभा, धूमप्रभा, तमप्रभा और महातमप्रभा - ये सात भूमियाँ हैं और क्रम से नीचे-नीचे घनोदधिवातवलय, घनवातवलय, तनुवातवलय तथा आकाश का आधार है। The lower world consists of seven earths* one below the other, surrounded by three kinds of air and space. तासु त्रिंशत्पञ्चविंशतिपञ्चदशदशत्रिपञ्चोनैकनरक- शतसहस्राणि पञ्च चैव यथाक्रमम् ॥२॥ उन पृथ्वियों में क्रम से पहली पृथ्वी में 30 लाख, दूसरी में 25 लाख, तीसरी में 15 लाख, चौथी में 10 लाख, पाँचवीं में 3 लाख, छठवीं में पाँच कम एक लाख (99,995) और सातवीं में 5 ही नरक बिल हैं। कुल 84 लाख नरकवास बिल हैं।
- Ratna, Şarkarā, Vālukā, Pańka, Dhūma, Tamaḥ and Mahātamaḥ – the word prabhā is taken with each of these. 36