भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 66

अध्याय - ४ पूर्वयोर्द्विन्द्राः ॥६॥ भवनवासी और व्यन्तरों में प्रत्येक भेद में दो-दो इन्द्र होते हैं। In the first two orders there are two lords. कायप्रवीचारा आ ऐशानात् ॥७॥ ईशान स्वर्ग तक के देव (अर्थात् भवनवासी, व्यन्तर, ज्योतिषी और पहिले तथा दूसरे स्वर्ग के देव) मनुष्यों की भाँति शरीर से काम-सेवन करते हैं। Up to Aiṣāna Kalpa they enjoy copulation. शेषाः स्पर्शरूपशब्दमनःप्रवीचाराः ॥८॥ शेष स्वर्ग के देव, देवियों के स्पर्श से, रूप देखने से, शब्द सुनने से और मन के विचारों से काम-सेवन करते हैं। The others derive pleasure by touch, sight, sound and thought. 53