तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ४ तत्कृतः कालविभागः ॥१४॥ घड़ी, घंटा, दिवस, रात इत्यादि व्यवहारकाल का जो विभाग है, वह गतिशील ज्योतिषी देवों के द्वारा किया जाता है। The divisions of time are caused by these. बहिरवस्थिताः ॥१५॥ मनुष्यलोक (अढ़ाई द्वीप) के बाहर के ज्योतिषी देव स्थिर हैं। They are stationary outside. वैमानिकाः ॥१६॥ अब वैमानिक देवों का वर्णन प्रारम्भ करते हैं। The Heavenly beings (Vaimānikāh). कल्पोपपन्नाः कल्पातीताश्च ॥१७॥ वैमानिक देवों के दो भेद हैं - 1. कल्पोपपन्न और 2. कल्पातीत। 56