भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 68, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 68

अध्याय - ४ व्यन्तर देवों के आठ भेद हैं- 1. किन्नर, 2. किम्पुरुष, 3. महोरग, 4. गन्धर्व, 5. यक्ष, 6. राक्षस, 7. भूत और 8. पिशाच। The Peripatetic devas comprise Kinnara, Kimpuruṣa, Mahoraga, Gandharva, Yakṣa, Rākṣasa, Bhūta, and Piśāca classes. ज्योतिष्काः सूर्याचन्द्रमसौ ग्रहनक्षत्रप्रकीर्णकतारकाश्च ॥१२॥ ज्योतिषी देवों के पाँच भेद हैं- 1. सूर्य, 2. चन्द्रमा, 3. ग्रह, 4. नक्षत्र और 5. प्रकीर्णक तारे। The Stellar (luminary) devas comprise the sun, the moon, the planets, the constellations, and the scattered stars. मेरुप्रदक्षिणा नित्यगतयो नृलोके ॥१३॥ ऊपर कहे हुए ज्योतिषी देव मेरु पर्वत की प्रदक्षिणा देते हुए मनुष्यलोक में हमेशा गमन करते हैं। In the human region they are characterized by incessant motion around Meru. 55

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या) · पृष्ठ 68, कुल 177 में से · BharatKosha