भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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अध्याय - ४ (But) there is decrease with regard to motion, stature, attachment, and pride. पीतपद्मशुक्ललेश्या द्वित्रिशेषेषु ॥२२॥ दो युगलों में पीत, तीन युगलों में पद्म और बाकी के सब विमानों में शुक्ल-लेश्या होती है। In two, three and the rest (they are of) yellow, rose (pink) and white thought-complexions. प्राग्ग्रैवेयकेभ्यः कल्पाः ॥२३॥ ग्रैवेयकों से पहिले के सोलह स्वर्गों को कल्प कहते हैं। उनसे आगे के विमान कल्पातीत हैं। Prior to Graiveyakas are the kalpas. ब्रह्मलोकालया लौकान्तिकाः ॥२४॥ जिनका निवास स्थान पाँचवां स्वर्ग (ब्रह्मलोक) है, उन्हें लौकान्तिक देव कहते हैं। Brahmaloka is the abode of Laukāntikas. 59