तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ४ सारस्वतादित्यवह्वयरुणगर्दतोयतुषिताव्याबाधारिष्टाश्च ॥२५॥ लौकान्तिक देवों के आठ भेद हैं:- 1. सारस्वत, 2. आदित्य, 3. वह्नि, 4. अरुण, 5. गर्दतोय, 6. तुषित, 7. अव्याबाध और 8. अरिष्ट - ये देव ब्रह्मलोक की ईशान इत्यादि आठ दिशाओं में रहते हैं। विजयादिषु द्विचरमाः ॥२६॥ विजय, वैजयन्त, जयन्त, अपराजित और अनुदिश विमानों के अहमिन्द्र द्विचरमा होते हैं अर्थात् मनुष्य के दो जन्म (भव) धारण करके अवश्य ही मोक्ष जाते हैं (ये सभी जीव सम्यग्दृष्टि ही होते हैं)। औपपादिकमनुष्येभ्यः शेषास्तिर्यग्योनयः ॥२७॥ उपपाद जन्म वाले (देव तथा नारकी) और मनुष्यों के अतिरिक्त बाकी बचे हुए तिर्यञ्च योनि वाले ही हैं। 60