भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 177 में से

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अध्याय - ५ संख्येयासंख्येयाश्च पुद्गलानाम् ॥१०॥ [ पुद्गलानाम् ] पुद्गलों के [ संख्येयासंख्येयाः च ] संख्यात, असंख्यात और अनन्त प्रदेश हैं। (The space-points) of forms of matter are numerable and innumerable also. नाणोः ॥११॥ [ अणोः ] पुद्गल परमाणु के [ न ] दो इत्यादि प्रदेश नहीं हैं अर्थात् एक प्रदेशी है। (There are) no space-points for the atom (indivisible unit of matter). लोकाकाशेऽवगाहः ॥१२॥ [ अवगाहः ] उपरोक्त समस्त द्रव्यों का अवगाह (स्थान) [ लोकाकाशे ] लोकाकाश में है। (These substances – the media of motion and rest, the souls and the forms of matter) are located in the space of the universe. 69

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