भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - ५ धर्माधर्मयोः कृत्स्ने ॥१३॥ [ धर्माधर्मयोः ] धर्म और अधर्म द्रव्य का अवगाह [ कृत्स्ने ] तिल में तेल की तरह समस्त लोकाकाश में है। The media of motion and rest pervade the entire universe-space. एकप्रदेशादिषु भाज्यः पुद्गलानाम् ॥१४॥ [ पुद्गलानाम् ] पुद्गल द्रव्य का अवगाह [ एक प्रदेशादिषु ] लोकाकाश के एक प्रदेश से लेकर संख्यात और असंख्यात प्रदेश पर्यन्त [ भाज्यः ] विभाग करने योग्य है - जानने योग्य है। The forms of matter occupy (inhabit) from one unit of space onwards. असंख्येयभागादिषु जीवानाम् ॥१५॥ [ जीवानाम् ] जीवों का अवगाह [ असंख्येयभागादिषु ] लोकाकाश के असंख्यात भाग से लेकर संपूर्ण लोक क्षेत्र में है। The souls inhabit from one of innumerable parts of the universe-space. 70