भारतकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

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अध्याय - ५ बन्धेऽधिकौ पारिणामिकौ च ॥३७॥ [ च ] और [ बन्धे ] बन्धरूप अवस्था में [ अधिकौ ] अधिक गुण वाले के परमाणुओं जितने गुण रूप में [ पारिणामिकौ ] (कम गुण वाले परमाणुओं का) परिणमन होता है। (यह कथन निमित्त का है।) गुणपर्ययवत् द्रव्यम् ॥३८॥ [ गुणपर्ययवत् ] गुण-पर्याय वाला [ द्रव्यम् ] द्रव्य है। कालश्च ॥३९॥ [ कालः ] काल [ च ] भी द्रव्य है।