तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
पृष्ठ 93, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 93
अध्याय - ६ अथ षष्ठोऽध्यायः Influx of Karma कायवाङ्मनःकर्म योगः ॥१॥ [ कायवाङ्मनः कर्म ] शरीर, वचन और मन के अवलम्बन से आत्मा के प्रदेशों का संकल्प होना सो [ योगः ] योग है। The action of the body, the organ of speech and the mind is called yoga (activity). स आस्रवः ॥२॥ [ सः ] वह योग [ आस्रवः ] आस्रव है। It (this threefold activity) is influx (āsrava). शुभः पुण्यस्याशुभः पापस्य ॥३॥ [ शुभः ] शुभ योग [ पुण्यस्य ] पुण्य कर्म के आस्रव में कारण है और [ अशुभः ] अशुभ योग [ पापस्य ] पाप कर्म के आस्रव में कारण है। Virtuous activity is the cause of merit (puṇya) and wicked activity is the cause of demerit (pāpa). 80