तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 100, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहाराज कृष्णदेव राय ने जब तेनाली राम की ओर देखा तो पाया कि वह किसी गहन चिन्ता में डूबा है। महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम को चिन्ता में डूबे देखकर पूछा, “क्या बात है तेनाली राम! आज कुछ चिन्तित मुद्रा में हो? तीन दिनों तक यहाँ आए ही नहीं...कोई सूचना भी नहीं दी...” “महाराज!” बीच में ही बोलते हुए तेनाली राम ने कहा, "अभी तो आप इन पाँच जोड़ों को अविलम्ब कारागार में भेज दें! इन लोगों पर ग्रामीणों के बीच अफवाह फैलाकर उन्हें आतंकित करने का आरोप है। इनके अफवाह फैलाने के प्रयासों का पर्याप्त साक्ष्य मेरे पास है। मैंने इन्हें इस कार्य में संलग्न पाया है। शेष बातें मैं बाद में करूँगा।” महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम के गम्भीर भाव को भाँपते हुए समझ लिया कि कोई ऐसी बात अवश्य है जो वह अन्य दरबारियों के समक्ष नहीं कहना चाहता है। महाराज के निर्देश पर पाँचों जोड़ों को कारागार में डाल दिया गया। महाराज कृष्णदेव राय ने अविलम्ब सभा विसर्जित कर दी। फिर तेनाली राम से कहा, “अब कहो तेनाली राम! कहाँ रहे तीन दिन? क्या करते रहे?...और इतने गम्भीर क्यों हो?” “महाराज, चिन्ता की बात है। विजयनगर में अराजकता फैलाने का प्रयास हो रहा है। अभी-अभी जिन जोड़ों को कारागार में भेजा गया है वे सभी पड़ोसी राज्य ‘सप्तद्वीप नवखंड’ के रहनेवाले हैं। इससे पहले जो लोग मवेशियों की खरीद-बिक्री के मामले में पकड़े गए थे, वे लोग भी उसी राज्य के रहनेवाले हैं। महाराज! मैंने जो सूचनाएँ एकत्रित की हैं उनमें सबसे चिन्ता की बात यह है कि ‘सप्तद्वीप नवखंड’ का राजा विचित्र भानु बहुत ही महत्त्वाकांक्षी है और अपनी धन-लोलुपता के कारण उसने अपने राज्य में विविध शुल्कों का प्रावधान किया है जिससे उसकी प्रजा त्रस्त है। इसमें हमारे लिए यह सूचना सतर्क करनेवाली है कि पड़ोसी राज्य ‘सप्तद्वीप नवखंड’ में तेज गति से सशस्त्र सेना का विकास हो रहा है। विजयनगर के सीमान्त क्षेत्रों में ‘सप्त नवखंड’ के सैनिकों की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ‘सप्तद्वीप नवखंड’ के सैनिक किसी सामरिक तैयारी में हैं, इसलिए महाराज! मेरी सलाह है कि सेनापति को आप स्थितियों की सूचना दे दें और उन्हें निर्देश दे दें कि विजयनगर की सीमाओं पर सैन्य चौकसी बढ़ा दी जाए। महत्त्वाकांक्षी, धन- लोलुप विचित्र भानु कब हमारी सीमाओं का अतिक्रमण करने को उत्सुक हो जाए, कहा नहीं जा सकता।” यह सब कहते समय तेनाली राम के चेहरे पर अपूर्व गम्भीरता छाई हुई थी। उसकी आँखों में ऐसे दूरद्रष्टा भाव थे जिन्हें देखकर यह सोचा भी नहीं जा सकता था कि तेनाली राम विजयनगर के दरबार में एक विदूषक मात्र है जिसका काम महाराज कृष्णदेव राय को हँसाना है, समय-समय पर दरबारियों को अपने चुटीले-हास्य प्रयोगों से प्रफुल्लित करना है।