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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

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समाज की व्यवस्थाएँ चलती रहीं बिना किसी परिवर्तन के।...लेकिन यह ‘हाँ’ कहना यथास्थिति बनाए रखना ही है। समाज का विकास या व्यवस्था में सुधार हाँ कहनेवाले की जरूरत होती है। दुनिया में कहीं भी यथास्थिति में परिवर्तन ‘न’ कहनेवालों के कारण हुआ है। जिसने आत्मा के गहरे तक से नकार का स्वर उभारा है वही विकास का कारण बने हैं। इसलिए मेरे मित्रो, सहज स्वीकार की जड़ता से निकलकर विकास की दहलीज पर कदम रखना सीखो और अनुचित को नकारकर उचित अवसरों पर तालियाँ भी बजा लिया करो...’’ बाबर के दरबार में एक बार फिर तालियों की गूँज उभरी। बाबर ने तेनाली राम को अनेक तरह के उपहार देकर दिल्ली से विदा किया।