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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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उस किसान ने लम्बी साँस ली और बोला, “क्या कहूँ भाई, सब किस्मत का खेल है। कभी इस खेत में फसलें लहलहाती थीं। इस साल ऊपरवाले ने ऐसा कहर बरपा किया है कि खेत में डाले गए बीज सूरज की तपिश से भुन गए। खाद बरबाद हो गई। इस बार यदि बारिश नहीं हुई तब बीज-खाद की कीमत भी जेब से भरनी होगी।” तेनाली राम ने उसे दिलासा देते हुए कहा, “अजीब बाजीगर है यह ऊपरवाला भी! कभी देता है तो कभी ले भी लेता है।” तेनाली राम की बातें सुनकर किसान ने उसकी ओर देखा। उसे तेनाली राम का चेहरा पहचाना-सा लगा। फिर उसे तेनाली राम से इसी मौसम में कुछ वर्ष पहले हुई मुलाकात की याद हो आई। उसने तेनाली राम से पूछा, “आप मेरा दुख जानना चाहते हैं, तो कटाक्ष क्यों कर रहे हैं? आपकी बातों से ऐसा लग रहा है मानो आप जले पर नमक छिड़कने आए हैं। आपकी बातें मुझे सान्त्वना नहीं दे रही हैं और न ही ढाढस बँधा रही हैं!” तेनाली राम ने उचित अवसर देखते हुए कहा, “बन्धु, तुम्हें स्मरण होगा जब हम लोग पिछली बार तुमसे यहीं पर मिले थे तब तुमने यह मानने से इनकार कर दिया था कि अच्छी फसल होना भगवान की कृपा है बल्कि अतिविश्वास से कहा था कि अच्छी फसल मेरी मेहनत का परिणाम है।...अब जब फसल बरबाद हो गई है तब इसके लिए तुम भगवान पर दोष मढ़ रहे हो! यह उचित नहीं है। अच्छे परिणाम का श्रेय खुद को देना और बुरे परिणाम के लिए भगवान को दोषी बताना उचित नहीं है। इसी खेत की फसलों से मुझे तो यही शिक्षा मिली है कि अच्छे परिणाम के लिए भगवान की कृपा और परिश्रम दोनों की आवश्यकता होती है।” किसान अवाक् होकर तेनाली राम का मुँह देखता रह गया। महाराज ने तेनाली राम की पीठ थपथपाई और दोनों आगे बढ़ गए।