तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंव्यवस्था कराने का आग्रह कर रहा था क्योंकि बरसात के दिनों में विजयनगर के पूर्वी भाग में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई थी जिससे किसानों में हताशा की स्थिति थी। वे आशंकित थे कि यदि सिंचाई की व्यवस्था समय रहते नहीं की गई तो खेत में लगी फसलें बरबाद हो जाएँगी और यदि ऐसा हुआ तो राज्य में खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो जाएगा। अभी यह बहस जारी थी तभी एक प्रहरी एक महिला के साथ सभा भवन में आया। तेनाली राम उन्हें देखते ही समझ गया कि अवश्य उसके कहने के अनुसार मुनादी करा दी गई है जिसके कारण यह महिला अपने बच्चे को लेने राजभवन में आई है। तेनाली राम की आशा के अनुरूप ही महिला ने महाराज के समक्ष अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, “वह उस बच्चे की माँ है जो महाराज को मन्दिर में मिला है।“ बच्चा पालने में महाराज के पास ही रखा गया था। महाराज ने महिला से कहा, ”आओ और आकर देख लो कि यही बच्चा तुम्हारा है?” महिला महाराज के आसन के पास गई। पालने में सोए बच्चे को भली प्रकार देखा। उसे गोद में लेकर उसे अपने सीने से चिपटा लिया और बिलखती हुई बोली, “जी हाँ, महाराज! यह बच्चा मेरा है। केवल इसके शरीर पर जो वस्त्र हैं, वे मेरे नहीं हैं। बच्चे का बाप नशेड़ी है। हमेशा नशे में धुत्त रहता है। कमाता-धमाता नहीं है। मैं अपनी तंगहाली से आजिज आ गई तब इस बच्चे को मन्दिर में भगवान के भरोसे छोड़ आई। अभी मैंने सुना कि आप इस बच्चे को आधा राज्य देनेवाले हैं तब मैं भागी-भागी यहाँ आ गई। आप यह न सोचें महाराज कि मैं किसी लोभ में यहाँ आई। मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। आप इस बच्चे की अच्छी परवरिश कराएँ, यही मेरे लिए बहुत है।” इतना कहकर उस महिला ने बच्चे को पालने में रख दिया और वहीं सुबक-सुबककर रोने लगी। अभी उसका रुदन चल ही रहा था कि प्रहरी एक अन्य महिला को साथ लिए आया और वह महिला जो अभी-अभी महाराज के सामने प्रस्तुत हुई, दूसरी बिलखती हुई महिला पर ध्यान दिए बिना ही बोली, “महाराज, मुझ अबला पर दया कीजिए! मैं अपनी गरीबी से तंग आकर अपने जिगर के टुकड़े से अलग हुई। वह अचानक पालने के पास पहुँची और बच्चे को गोद में उठाकर उसे अपने सीने से लगाकर बेतहाशा चूमने लगी। उसके हाव-भाव से भी यही प्रकट हो रहा था कि वही उस बच्चे की वास्तविक माँ है। महाराज सहित सभी सभासद असमंजस की स्थित में थे कि आखिर इन दोनों महिलाओं में से बच्चे की असली माँ कौन है? तभी तेनाली राम ने अपने आसन से उठकर महिलाओं से पूछा, “ठीक-ठीक बताओ, इस बच्चे की माँ कौन है?”