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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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दोनों महिलाओं के मँह से हठात् निकला, “मैं!” तेनाली राम ने बिना उनकी ओर देखे जोर से कहा, “प्रहरी! बच्चे को तलवार से दो टुकड़े कर दो और इन दोनों महिलाओं को बच्चे का एक-एक टुकड़ा दे दो। झमेला ही खत्म! सुबह से इस बच्चे के कारण राजभवन का कामकाज प्रभावित हो रहा है।” तेनाली राम के स्वरों में खीज और क्रोध का मिला-जुला सम्मिश्रण था। तेनाली राम का यह आदेश सुनते ही पहली महिला के मँुह से अचानक जोरों की चीख निकली, “नहीं!” और वह अपने स्थान से उठकर दो-तीन छलाँग में ही तेनाली राम के पास पहुँचकर उसके पाँवों से लिपटकर विलाप करने लगी, “कृपा कीजिए! ऐसा अनर्थ मत कीजिए! आप यह बच्चा उसी महिला को दे दीजिए! वही उसकी असली माँ है। मैं तो लोभी हूँ। बच्चे को आधा राज्य मिलने के लालच में यहाँ चली आई। मैं उसकी माँ नहीं हूँ, मुझे जो सजा देना चाहें, दे लें मगर बच्चे को कुछ न करें।” इस महिला का यह आचरण देखकर तेनाली राम अपने निष्कर्ष पर पहुँच चुका था। उसने प्रहरियों को बुलाकर दूसरी महिला को गिरफ्तार कर लेने का निर्देश दिया और अपने पैरों से लिपटी महिला को स्नेहपूर्वक उठाया और कहा, “चुप हो जाओ माँ! तेरे लाल को कुछ नहीं होगा। उसका बाल भी बाँका न होगा। चुप हो जाओ!” महिला खड़ी हुई और अपने आँसू पोंछे लेकिन उसकी हिचकियाँ बँधी हुई थीं और रह- रहकर सुबक उठती थी। तेनाली राम ने गिरफ्तार की गई महिला से जाकर पूछताछ की। शीघ्र ही वह महिला टूट गई। उसने स्वीकार कर लिया कि वह बच्चे को आधा राज्य मिलने की घोषणा सुनकर लालच में आ गई और उसी लोभ में पड़कर उसकी माँ होने का दावा कर बैठी। उस महिला की गरीबी और विवशताओं के बारे में जानकर तेनाली राम को उस पर दया आ गई और उसने उसे मुक्त करा दिया। इसके बाद तेनाली राम पहली महिला को साथ लेकर महाराज के पास गया और कहा, “महाराज! यही है इस बच्चे की असली माँ। जो अपने बच्चे को काटे जाने की धमकी से उद्वेलित हो गई और इस बात से भी मुकर गई कि वह उसकी माँ है। इसमें इसका यही स्वार्थ था कि बच्चे को कुछ न हो। वह सुरक्षित रहे।“ महाराज ने महिला की वास्तविक स्थिति का अनुमान लगा लिया और बच्चे सहित उसकी परवरिश की व्यवस्था राज्य की ओर से करा दी।

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